✕
साल की सबसे बड़ी बिकवाली? FII ने छोड़ा भारतीय बाजार
By EditorialPublished on
इस साल भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी की है। अब तक उन्होंने 1.21 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। दूसरी ओर, घरेलू निवेशकों ने बाजार में विश्वास जताते हुए 2.75 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं, जिससे बाजार को स्थिरता मिलने में मदद मिली है।

x
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 30 मई को FIIs ने कुल 6,450 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले, जिससे बाजार में हल्की कमजोरी देखी गई। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस गिरावट का फायदा उठाते हुए 9,095 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और बाजार को सहारा दिया।
कारोबारी सत्र के दौरान आंकड़े बताते हैं कि घरेलू निवेशकों ने कुल 20,673 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे जबकि 11,577 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की। इसके उलट विदेशी निवेशकों ने 44,434 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 50,884 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। इससे यह स्पष्ट होता है कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मजबूत आधार मिला है।
साल 2025 में अब तक की स्थिति :
इस वर्ष अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल 1,21,414 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। वहीं, घरेलू निवेशकों ने बाजार में भरोसा जताते हुए 2,75,264 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। यह ट्रेंड बताता है कि जहां एक ओर वैश्विक अनिश्चितताओं और जोखिमों के चलते विदेशी निवेशक सतर्क हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू निवेशक बाजार की नींव को मजबूत बना रहे हैं।
बाजार में गिरावट और सेक्टर आधारित दबाव :
शुक्रवार को निफ्टी 50 सूचकांक 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,751 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। यह लगातार चौथा ऐसा सत्र रहा जिसमें बाजार संकुचित दायरे में कारोबार करता नजर आया। ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी बनी रही और निफ्टी मिडकैप 100 तथा स्मॉलकैप 100 में 0.1 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर आईटी, मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिकवाली का दबाव अधिक रहा।
घरेलू निवेशकों से मिला सहारा :
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति बाजार को नीचे जाने से रोक रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के सकारात्मक संकेत :
हाल ही में जारी हुए आंकड़ों के अनुसार भारत की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में GDP ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रही है, जो कि पूर्वानुमानित 6.7 प्रतिशत से अधिक है। पूरे वित्त वर्ष 2025 के लिए GDP ग्रोथ 6.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जो एक स्थिर और मजबूत आर्थिक वातावरण की ओर इशारा करता है।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
वैश्विक आर्थिक चिंताएं और आगे की रणनीति :
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास को लेकर चिंता बनी हुई है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में वर्ष की पहली तिमाही (Q1CY25) में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि यह अनुमानित 0.3 प्रतिशत से बेहतर है। इसने फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह फेड द्वारा ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर, विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में हलचल देखी जा सकती है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर पर नजर :
अगले सप्ताह मासिक ऑटो बिक्री और वॉल्यूम डेटा जारी होने वाला है, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में सेक्टर-विशेष मूवमेंट देखने को मिल सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस डाटा और वैश्विक संकेतकों पर टिकी रहेगी, जो निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जरूर चिंता का विषय है, लेकिन घरेलू निवेशकों की मजबूती और भारत की आर्थिक स्थिति बाजार को संतुलित बनाए हुए है। आने वाले सप्ताहों में नीतिगत फैसले और सेक्टर-विशेष डाटा बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे।

Editorial
Next Story
Related News
X
