✕
बर्खास्त मुनीर अहमद पर नई गाज; पाक कनेक्शन ने फंसाया!
By EditorialPublished on
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में पूर्व सीआरपीएफ कांस्टेबल मुनीर अहमद की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ा अपडेट सामने आया है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को नोटिस जारी करते हुए 30 जून से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुनीर अहमद ने अपनी याचिका में बर्खास्तगी को चुनौती दी है, जिसे पाकिस्तानी महिला से शादी करने के चलते सेवा से हटाया गया था। अब इस मामले में अगली सुनवाई 30 जून को होगी, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

x
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पूर्व सीआरपीएफ कांस्टेबल मुनीर अहमद की बर्खास्तगी के मामले में केंद्र सरकार और सीआरपीएफ से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय (MHA) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को निर्देश दिया है कि वे 30 जून से पहले इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें।
मुनीर अहमद ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने अपनी बर्खास्तगी को "मनमाना और नियमों के खिलाफ" करार दिया। अहमद का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी नागरिक मीनल खान से शादी से पहले विभाग को सभी आवश्यक सूचनाएं दी थीं और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया था। उन्होंने कहा कि मीनल का परिवार 1947 में पाकिस्तान चला गया था और वह उनकी चचेरी बहन हैं।
पहले दी थी जानकारी, फिर भी हुई कार्रवाई :
मुनीर अहमद ने अदालत में बताया कि उन्होंने पहली बार 2022 में शादी के लिए अनुमति मांगी थी, जिसे 2023 में कुछ आपत्तियों के साथ लौटा दिया गया। हालांकि इसके बाद 2023 और 2024 में उन्होंने दोबारा आवेदन किया और उन्हें सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित मंजूरी भी मिली। इसके बावजूद, उन्हें मार्च 2025 में भोपाल स्थित 41वीं बटालियन में ट्रांसफर कर दिया गया, और मई 2025 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
राजनीतिक समर्थन भी आया सामने :
याचिका में अहमद ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के समर्थन पत्र भी अदालत को सौंपे। राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना और सांसद जुगल किशोर शर्मा ने इस मामले में विदेश मंत्री और गृह राज्य मंत्री को पत्र लिखकर अहमद की पत्नी के वीजा और विवाह को लेकर समर्थन जताया था।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
कानूनी जटिलताओं पर उठे सवाल :
यह मामला उन सुरक्षा बलों के कर्मियों के लिए एक मिसाल बन सकता है जो सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले भारतीयों के विदेशी नागरिकों से वैवाहिक संबंधों को लेकर आने वाली कानूनी और प्रक्रिया संबंधी अड़चनों का सामना करते हैं। हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई इस बात को तय कर सकती है कि क्या विभागीय कार्रवाई में नियमों का पालन हुआ या यह केवल पाकिस्तानी नागरिक से विवाह के आधार पर की गई बर्खास्तगी थी। अब सबकी नजरें 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से इस संवेदनशील मामले में अहम दिशा मिलने की उम्मीद है।

Editorial
Next Story
Related News
X
