✕
अंकिता हत्याकांड: पुलकित-सौरभ- अंकित दोषी, उम्रकैद की सजा!
By EditorialPublished on
अंकिता भंडारी हत्याकांड: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार इंसाफ की घड़ी आ गई है। वनतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता 18 सितंबर 2022 को रहस्यमय ढंग से लापता हो गई थी। कुछ दिन बाद उसका शव चीला नहर से बरामद हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब इस मामले में कोर्ट ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी है, जिससे पीड़ित परिवार को लंबे समय बाद न्याय की उम्मीद जगी है।

x
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
इस हाई प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य तत्कालीन भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। मामले के उजागर होते ही पार्टी ने विनोद आर्य को बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
क्या था मामला ?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र की रहने वाली थी और ऋषिकेश के पास स्थित वनतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। छह दिन बाद, 24 सितंबर को उसका शव चीला नहर से बरामद किया गया।
जांच में सामने आया कि अंकिता का पुलकित आर्य के साथ विवाद हुआ था। पुलकित ने अपने दो कर्मचारियों सौरभ और अंकित के साथ मिलकर अंकिता को चीला नहर में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। यह भी सामने आया कि पुलकित ने अंकिता पर किसी वीआईपी गेस्ट को "स्पेशल सर्विस" देने का दबाव बनाया था, जिसका विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी गई।
जांच और सुनवाई :
इस सनसनीखेज़ हत्याकांड से उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, जिसने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने कुल 97 गवाहों की सूची तैयार की, जिनमें से 47 प्रमुख गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया।
करीब दो साल आठ महीने तक यह मामला अदालत में चला और अंततः 30 मई 2025 को कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आईपीसी की धाराओं 302 (हत्या), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना) और 120बी (षड्यंत्र) के तहत उम्रकैद और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
समाज में उठते सवाल :
यह मामला केवल एक हत्या नहीं, बल्कि सत्ता, नैतिक पतन और महिलाओं की सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया। अंकिता की हत्या ने यह भी उजागर किया कि किस तरह प्रभावशाली लोग कानून की आड़ में अपराधों को अंजाम देने का साहस करते हैं।
हालाँकि आज का फैसला पीड़ित परिवार और समाज के लिए एक राहत है, लेकिन यह भी चेतावनी है कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार के बराबर है। अब जब दोषी सलाखों के पीछे हैं, देशभर में न्याय की उम्मीदें फिर एक बार जागी हैं। न्याय की लड़ाई लंबी थी, लेकिन मंज़िल आखिर मिली – अंकिता को इंसाफ मिला।

Editorial
Next Story
Related News
X
