गाजा का बहाना, सिंधु जल पर पाकिस्तान का नया प्रोपेगेंडा!
भारत की ओर से सिंधु जल संधि को लेकर उठाए गए कदमों के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत पर गंभीर आरोप लगाए। ग्लेशियरों के संरक्षण को लेकर हो रहे इस सम्मेलन में शरीफ ने सिंधु जल संधि को गाजा संकट से जोड़ते हुए कहा कि अब पानी को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि पर "रेड लाइन" को पार नहीं करने देगा।
'जख्म पर जख्म, अब पानी बना हथियार' :
शहबाज शरीफ ने कहा, “दुनिया गाजा में पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल से बने ताजा जख्मों को देख रही है, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि एक जख्म काफी नहीं था। अब पानी को भी एक खतरनाक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने सीधे तौर पर भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिंधु जल संधि को निलंबित करने का एकतरफा और अवैध कदम निंदनीय है और इसका मकसद पाकिस्तान की करोड़ों जनता को पानी से वंचित करना है।
भारत के फैसलों से तिलमिलाया पाकिस्तान :
गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि की समीक्षा करने का फैसला लिया था। इसी क्रम में भारत ने संधि को आंशिक रूप से स्थगित कर दिया है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को प्रश्रय देता है और ऐसे में जल समझौते जैसी उदार व्यवस्था पर पुनर्विचार होना चाहिए।
सिंधु जल संधि: एक ऐतिहासिक समझौता :
साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुई इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) और पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर नियंत्रण मिला। पाकिस्तान की 80% कृषि सिंचाई व्यवस्था इन्हीं नदियों पर निर्भर है। ऐसे में भारत के किसी भी एकतरफा निर्णय का सीधा प्रभाव पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
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भारत पर दोहरे मापदंड का आरोप :
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कोई भी देश राजनीतिक लाभ के लिए लाखों लोगों के जीवन को संकट में नहीं डाल सकता। उन्होंने कहा, “हम इस समझौते को किसी भी हाल में टूटने नहीं देंगे। पाकिस्तान अपनी सीमाएं जानता है लेकिन यह भी जानता है कि उसे कहां रेखा खींचनी है।”
भारत के कड़े रुख ने एक बार फिर से सिंधु जल संधि को वैश्विक बहस का मुद्दा बना दिया है। पाकिस्तान की बढ़ती चिंता इस बात का संकेत है कि अब भारत अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पाकिस्तान पर जल कूटनीति के जरिए भी दबाव बनाने को तैयार है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और प्रभावित कर सकता है।
Editorial

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