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बीजेपी-सपा आमने-सामने; प्रयागराज विवाद ने पकड़ा तूल
By EditorialPublished on
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अभ्यर्थियों के धरना-प्रदर्शन ने सियासी तूल पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस आंदोलन के पीछे समाजवादी पार्टी (सपा) का हाथ होने का आरोप लगाया है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि अगर सपा इस आंदोलन में होती तो तस्वीर कुछ और ही होती। अब यह मुद्दा छात्रों की मांगों से हटकर सियासी जंग का मैदान बनता जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का धरना अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। यह आंदोलन केवल बेरोजगारी और भर्ती से जुड़ा नहीं रहा, बल्कि अब इसने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। अभ्यर्थियों के इस शांतिपूर्ण मगर जुझारू प्रदर्शन को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
अभ्यर्थियों की मांगें और नाराजगी :
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि हाल ही में करीब दो लाख पदों पर शिक्षक भर्ती का विज्ञापन सामने आया था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसे बिना किसी स्पष्ट कारण के सोशल मीडिया और आधिकारिक पोर्टलों से हटा लिया गया। इस घटनाक्रम ने अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश पैदा किया है। छात्र नेता रजत सिंह के नेतृत्व में अभ्यर्थी लगातार प्रयागराज के धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
धरने में शामिल कई छात्रों ने अपनी आर्थिक और मानसिक स्थिति का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि वे साधारण परिवारों से आते हैं, और बार-बार स्थगित होती भर्ती प्रक्रिया ने उनके परिवारों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम अच्छे घरों से नहीं हैं। घरवाले थक चुके हैं, हम खुद मानसिक रूप से परेशान हैं। अब हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है।”
बीजेपी का आरोप, सपा की प्रतिक्रिया :
इस आंदोलन को लेकर सियासत भी अब गर्म होती जा रही है। भाजपा समर्थकों और कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर दावा किया गया कि धरने में शामिल कुछ अभ्यर्थियों का सीधा संबंध समाजवादी पार्टी से है। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “भाजपा को लग रहा है कि हर धरने-महाधरने के पीछे हम हैं, तो इसका मतलब इस तरह समझा जाए कि हर बेरोज़गार और हर पीड़ित, दुखी व अपमानित ‘पीडीए’ के रूप में हमारे साथ है और हम उनके साथ हैं। जब तक विज्ञापन नहीं, तब तक समापन नहीं। जो पीड़ित, वो पीडीए।” यह बयान न केवल अखिलेश की राजनीतिक चतुराई को दर्शाता है बल्कि यह भी इंगित करता है कि विपक्ष इस मौके को युवाओं की नाराजगी को भुनाने के लिए तैयार है।
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सरकार की चुप्पी पर सवाल :
धरना प्रदर्शन कई दिनों से चल रहा है, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस बयान या समाधान सामने नहीं आया है। इससे अभ्यर्थियों में यह धारणा बन रही है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है।
शिक्षक भर्ती की यह मांग अब सिर्फ रोजगार का मसला नहीं रह गया, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति और उनके भविष्य की लड़ाई बन चुका है। सरकार को जल्द कोई सकारात्मक और संवेदनशील कदम उठाना होगा, वरना यह आंदोलन प्रदेश भर में एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है। साथ ही, राजनीतिक दलों को भी इस मुद्दे को राजनीतिक रोटियां सेंकने की बजाय समाधान केंद्रित दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

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