मणिपुर में राष्ट्रपति शासन खत्म? BJP ने ठोका दावा!
मणिपुर की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। फरवरी 2024 से राष्ट्रपति शासन के अधीन चल रहे राज्य में अब एक बार फिर सरकार बनने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। बुधवार, 28 मई 2025 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता राधेश्याम सिंह ने नौ अन्य विधायकों के साथ राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और दावा किया कि 44 विधायक सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद राधेश्याम सिंह ने कहा, "44 विधायक जनता की इच्छा के अनुसार सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। हमने राज्यपाल को यह स्पष्ट कर दिया है और समाधान के संभावित रास्तों पर भी चर्चा की है।" उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत ने सभी 44 विधायकों से व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से मुलाकात की है, और किसी ने भी सरकार गठन का विरोध नहीं किया है।
बीजेपी का दावा, केंद्रीय नेतृत्व लेगा अंतिम निर्णय :
हालांकि राधेश्याम सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय BJP का केंद्रीय नेतृत्व लेगा। उन्होंने कहा, "यह बताना कि हम तैयार हैं, अपने आप में सरकार बनाने का दावा पेश करने जैसा है। अब निर्णय शीर्ष नेतृत्व को करना है।"
राजनीतिक पृष्ठभूमि और जातीय संघर्ष :
मणिपुर में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। इससे पहले, मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा के कारण राज्य में अराजकता का माहौल बन गया था। मई 2023 में शुरू हुई इस हिंसा के बाद कांग्रेस ने एन. बीरेन सिंह की सरकार को जमकर घेरा था और उनकी विफलताओं को मुद्दा बनाया था।
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विधानसभा का समीकरण :
मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 59 विधायक हैं, क्योंकि एक सीट एक विधायक के निधन के कारण खाली है। BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास 44 विधायकों का समर्थन है, जिनमें 32 मेइती, 3 मणिपुरी मुस्लिम और 9 नगा विधायक शामिल हैं। विपक्ष में कांग्रेस के 5 विधायक हैं जो सभी मेइती समुदाय से हैं। शेष 10 कुकी विधायक हैं, जिनमें से 7 बीजेपी से निर्वाचित, 2 कुकी पीपुल्स अलायंस से और 1 निर्दलीय हैं।
जन-जीवन और राजनीतिक ठहराव :
राधेश्याम सिंह ने यह भी कहा कि मणिपुर के लोग पिछले चार सालों से दोहरी मार झेल रहे हैं—पहले कोविड की मार और फिर जातीय संघर्ष। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब और नहीं चल सकती और राज्य को स्थायी सरकार की सख्त जरूरत है।
राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे मणिपुर में अब बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनने की उम्मीदें फिर से जगी हैं। अब सबकी निगाहें राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे क्या फैसला लेते हैं। अगर सबकुछ योजनानुसार चलता है, तो मणिपुर को जल्द ही एक नई निर्वाचित सरकार मिल सकती है।
Editorial

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