✕
SC का आदेश: अली खान को मिली अंतरिम जमानत; SIT जांच जारी
By EditorialPublished on
सुप्रीम कोर्ट ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि उनके खिलाफ की जा रही SIT जांच को केवल दो सोशल मीडिया पोस्टों तक सीमित रखा जाए। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय प्रक्रिया की संतुलन को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा इन दो पोस्टों से आगे नहीं बढ़ेगा, जिससे यह मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।

x

अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद एक बार फिर चर्चा में हैं। पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर किए गए विवादित पोस्ट के चलते उनकी गिरफ्तारी हुई थी और अब इस मामले में हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT (विशेष जांच दल) गठित कर दी है। बुधवार, 28 मई 2025 को राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि तीन आईपीएस अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो इस मामले की जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई जांच पर शर्तें :
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने साफ निर्देश दिए हैं कि एसआईटी की जांच केवल दो सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित रहनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोफेसर अली खान के डिवाइस जब्त करने या उनके अन्य किसी पहलू की जांच करने की आवश्यकता नहीं है। जांच रिपोर्ट सबसे पहले कोर्ट को सौंपी जाएगी और जुलाई में अगली सुनवाई के दौरान इस पर चर्चा की जाएगी।
साथ ही कोर्ट ने प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सख्त चेतावनी दी है कि वे पहल्गाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े किसी भी विषय पर आगे कोई पोस्ट नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अली खान को बोलने और लिखने की आज़ादी है, लेकिन यह स्वतंत्रता जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए।
कपिल सिब्बल की दलीलें :
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, जो अली खान महमूदाबाद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए, ने कहा कि इस तरह की जांच एक गलत उदाहरण पेश कर सकती है और यह शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कोर्ट से इस जांच को सीमित या रद्द करने की अपील की। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में जांच को तय रूप में चलने दिया जाए और अगली सुनवाई में स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
क्या है मामला ?
अली खान महमूदाबाद, जो अशोका यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, ने पिछले सप्ताह ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसे लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया। इस पोस्ट को लेकर उन्हें 18 मई को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें सेशन कोर्ट ने 27 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी, लेकिन साथ ही उनके पोस्ट पर कड़ी टिप्पणी भी की।
अभी प्रातःकाल Telegram चैनल को Subscribe करें और बनें ₹25,000 के लकी विनर!
कोर्ट ने कहा कि यह पोस्ट "डॉग व्हिसलिंग" (छिपे हुए राजनीतिक संकेत) का उदाहरण है और इसे "चीप पॉप्युलैरिटी" पाने की कोशिश करार दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि देश के मौजूदा माहौल में जिम्मेदार शिक्षकों से संवेदनशीलता और सतर्कता की अपेक्षा होती है।
इस पूरे मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि SIT की जांच किस दिशा में जाती है और क्या अली खान महमूदाबाद को आगामी सुनवाई में राहत मिलती है या उन्हें और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

Editorial
Next Story
Related News
X
