तृणमूल कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र की मांग की।
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की मांग।
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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसदों ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि विशेष सत्र में पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा कराई जाए। टीएमसी के सांसदों ने पुराने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में बैठक के बाद यह मांग की।
सांसदों ने व्यक्त की संवेदना
टीएमसी के सांसदों ने पहलगाम हमले में जान गंवाने वालों के सम्मान में एक मिनट का मौन रखा। सांसदों ने इस हमले की निंदा की और शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। टीएमसी के सांसदों ने कहा कि यह हमला न केवल कश्मीर के लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा झटका है।
विशेष सत्र की मांग
टीएमसी के सांसदों ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा कराई जाए। सांसदों ने कहा है कि यह विशेष सत्र देश के लिए महत्वपूर्ण होगा और इसमें देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा सकेगी। टीएमसी के सांसदों ने कहा है कि संसद का विशेष सत्र बुलाने का समय आ गया है, भारत के नागरिकों को भी पाकिस्तान आधारित आतंकवाद से निपटने में सरकार के कदमों के बारे में जानने की जरूरत है।
सरकार से जवाबदेही की मांग
टीएमसी के सांसदों ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है। सांसदों ने कहा है कि सरकार को बताना चाहिए कि वह पाकिस्तान आधारित आतंकवाद से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। टीएमसी के सांसदों ने कहा है कि सरकार को संसद में विपक्षी दलों के सवालों का जवाब देना चाहिए और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
विपक्षी दलों के साथ मिलकर चर्चा की मांग
टीएमसी के सांसदों ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर चर्चा की मांग की है। सांसदों ने कहा है कि संसद में विपक्षी दलों के साथ मिलकर देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना आवश्यक है। टीएमसी के सांसदों ने कहा है कि सरकार को संसद में विपक्षी दलों के सवालों का जवाब देना चाहिए और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
टीएमसी के सांसदों ने संसद के विशेष सत्र की मांग की है जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा कराई जाए। सांसदों ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है और विपक्षी दलों के साथ मिलकर चर्चा की मांग की है। यह देखना होगा कि सरकार टीएमसी की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए क्या कदम उठाती है।
Editorial

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