India का सिंधु जल पर सर्जिकल स्ट्राइक; Pakistan को तगड़ा झटका
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) अब एक बड़े भू-राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार, 24 मई 2025 को संसदीय समिति के समक्ष स्पष्ट किया कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करना पाकिस्तान की ओर से किए गए उल्लंघनों का सीधा परिणाम है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि संधि को फिर से देखने और इसके प्रावधानों की समीक्षा की आवश्यकता है क्योंकि बदलते तकनीकी और जलवायु परिदृश्य ने इसके क्रियान्वयन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

भारत ने क्यों उठाया यह कदम ?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि 1960 में हस्ताक्षरित यह संधि दोनों देशों के बीच मित्रता, सहयोग और सद्भावना पर आधारित थी, लेकिन पाकिस्तान ने इन मूल सिद्धांतों का पालन नहीं किया है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, "1960 की संधि की प्रस्तावना में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह सौहार्द और मित्रता की भावना से की गई थी। लेकिन आज, पाकिस्तान ने इन सभी बुनियादी सिद्धांतों को नष्ट कर दिया है।"
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने बार-बार भारत के बुनियादी अधिकारों और परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई है, जिससे संधि का संतुलन बिगड़ा है।
जलवायु परिवर्तन और तकनीकी बदलाव भी बने कारण :
मंत्रालय ने समिति को यह भी बताया कि इंजीनियरिंग तकनीकों में बदलाव, जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने जैसे कई जमीनी बदलाव हुए हैं, जिनका सीधा असर भारत और पाकिस्तान के जल-बंटवारे पर पड़ा है। ऐसे में पुराने नियम और मानक अब व्यावहारिक नहीं रह गए हैं, और इन पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है।
आतंकवाद के बाद बढ़ा दबाव :
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत में पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना हुआ है। भारत सरकार का कहना है कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश के साथ ‘सद्भावना’ की कोई गुंजाइश नहीं है।
इसी संदर्भ में भारत ने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को 33 देशों के दौरे पर भेजा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान की नीतियों के खिलाफ लामबंद करना है।
पाकिस्तान की तरफ से सियासी हड़कंप :
भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक भूचाल आ गया है। पाकिस्तानी सांसद सैयद अली जफर ने शुक्रवार को कहा, “अगर पानी का ये मुद्दा हल नहीं किया गया तो पाकिस्तान में भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है। हमारी 90% फसलें सिंधु बेसिन पर निर्भर हैं और उसका तीन-चौथाई हिस्सा भारत से आता है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस संकट का समाधान नहीं निकला तो पाकिस्तान को खाद्य संकट, आर्थिक बदहाली, और सामाजिक अशांति जैसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता और संधि की मूल भावना का सम्मान नहीं करता, तब तक वह इस समझौते को पूरी तरह से बहाल करने के पक्ष में नहीं है।
सरकार इस पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए पूरी तैयारी में है, और सभी आवश्यक राजनयिक व कानूनी विकल्पों को खुला रखे हुए है।
सिंधु जल समझौते को लेकर भारत का रुख अब बेहद सख्त हो गया है। यह न सिर्फ पाकिस्तान के लिए एक बड़ा जल संकट पैदा कर सकता है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में एक नया मोड़ भी ला सकता है। अगर पाकिस्तान ने जल्द समाधान की ओर कदम नहीं बढ़ाए, तो उसका खेती, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में आ सकते हैं। भारत की तरफ से यह संदेश साफ है— अब सिर्फ समझौते नहीं, भरोसे की बुनियाद पर रिश्ते बनेंगे।
Next Story