सुप्रीम कोर्ट की फटकार: कोटा में छात्रों की आत्महत्या पर राजस्थान सरकार को नोटिस।
कोटा के छात्रों की जान दांव पर, सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग।
supreme court
राजस्थान के कोटा शहर में छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर कोटा में ही आत्महत्या के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है और SIT के गठन की जानकारी ली है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों की दिमागी सेहत के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया गया था, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। कोर्ट ने कहा, "आप हमारे पिछले फैसले की अवहेलना कर रहे हैं।" अदालत ने पूछा कि FIR दर्ज करने में चार दिन की देरी क्यों हुई? कोर्ट ने वॉर्निंग दी कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसे हल्के में न लें।
राज्य सरकार का जवाब
राजस्थान सरकार के वकील ने जवाब देते हुए कहा कि आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए राज्य में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। SIT का काम है कि वह इन मामलों की गहराई से जांच करे और पता लगाए कि आत्महत्याओं के पीछे क्या कारण हैं। हालांकि, कोर्ट ने सरकार से पूछा कि एक राज्य के रूप में आप क्या कर रहे हैं? ये बच्चे आत्महत्या क्यों कर रहे हैं और केवल कोटा में ही क्यों? क्या आपने एक राज्य के रूप में इस पर गंभीरता से विचार किया?
कोटा में छात्रों की आत्महत्या का मामला
इस साल अब तक कोटा में 14 छात्रों ने आत्महत्या की है। कोटा देश का एक बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, जहां हर साल लाखों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए आते हैं। कोर्ट ने पाया कि कोटा वाले मामले में अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है, जिस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है।
अदालत की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस पर सख्त रुख अपना सकता है, लेकिन फिलहाल वह संयम बरत रहा है। कोर्ट ने कोटा के एक पुलिस अधिकारी को 14 जुलाई को तलब किया है, ताकि वह बताएं कि FIR दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने आखिर में कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसे हल्के में न लें।
कोटा में छात्रों की आत्महत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार से साफ है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है। अब देखना होगा कि राजस्थान सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और क्या कदम उठाती है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस मामले की आगे की सुनवाई होगी और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर कोई ठोस फैसला आएगा।
Editorial

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