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FATF ग्रे लिस्ट में फिर फंसेगा पाक; भारत की तैयारी पूरी!
By EditorialPublished on
पाकिस्तान पर भारत की बड़ी कूटनीतिक तैयारी, FATF में फिर उठेगा आतंक का मुद्दा भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय एक्शन की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से आतंकियों को पनाह देने और फंडिंग रोकने में नाकामी को लेकर पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल करने की मांग कर सकता है। यह कदम पाकिस्तान की दोहरी नीति और सीमा पार आतंकवाद को लेकर गहराते वैश्विक चिंता के बीच उठाया जा रहा है।

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पाकिस्तान पर एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव की तैयारी भारत ने शुरू कर दी है। हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के ज़रिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहार किया था। अब कूटनीतिक मोर्चे पर भारत ने पाकिस्तान को घेरने की योजना बनाई है। भारत जल्द ही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल करने की मांग कर सकता है।
FATF एक वैश्विक संस्था है जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग पर नजर रखना और उसे रोकना है। भारत का यह कदम ऐसे वक्त पर सामने आया है जब पहलगाम हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की जान गई थी और इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ माना जा रहा है।
बार-बार आतंक का सहारा लेता पाकिस्तान :
पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को शह देता आ रहा है और विभिन्न आतंकी संगठनों को आर्थिक सहायता प्रदान करता रहा है। यही वजह है कि उसे अतीत में कई बार FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जा चुका है।
- पाकिस्तान को पहली बार 2008 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था लेकिन 2009 में हटा दिया गया।
- इसके बाद वह 2012 से 2015 के बीच फिर से ग्रे लिस्ट में रहा।
- सबसे लंबा कार्यकाल जून 2018 से अक्टूबर 2022 तक रहा, जब FATF ने उसे टेरर फंडिंग रोकने में असफल बताते हुए ग्रे लिस्ट में डाला था।
हालांकि अक्टूबर 2022 में FATF ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था, लेकिन भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में कोई ठोस बदलाव नहीं किया है। पहलगाम हमला इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें मारे गए आतंकियों को पाकिस्तान ने सम्मानजनक अंतिम संस्कार दिया और उनके जनाजे में पाक सेना के अधिकारी तक शामिल हुए।
FATF की ग्रे लिस्ट में क्या होता है नुकसान ?
अगर कोई देश FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है तो उसे वैश्विक स्तर पर कई तरह के आर्थिक और राजनीतिक नुकसान झेलने पड़ते हैं।
- विदेशी निवेशकों का विश्वास कम हो जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में मुश्किलें आती हैं।
- वर्ल्ड बैंक, IMF जैसी संस्थाएं फंड देने से कतराती हैं।
- राजनीतिक रूप से भी देश की साख पर असर पड़ता है।
- ऐसे में अगर पाकिस्तान दोबारा ग्रे लिस्ट में शामिल होता है तो उसकी डांवाडोल अर्थव्यवस्था और अधिक संकट में आ सकती है।
वर्ल्ड बैंक और IMF पर भी भारत का प्रहार :
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब वर्ल्ड बैंक से भी पाकिस्तान को मिलने वाली फंडिंग का विरोध कर सकता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर का कर्ज देने की मंजूरी दी थी, यह कहते हुए कि पाकिस्तान ने सभी शर्तों का पालन किया है।
भारत इस निर्णय से नाखुश है और पहले भी IMF से पाकिस्तान को लोन देने का विरोध कर चुका है। अब वर्ल्ड बैंक से भी यह मांग की जा सकती है कि वह एक आतंक को शह देने वाले देश को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता न दे।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकियों पर करारा प्रहार
पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्त कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया और 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया।
इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने मारे गए आतंकियों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया, जिसमें पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इससे पाकिस्तान की भूमिका एक बार फिर से वैश्विक मंच पर बेनकाब हो गई।
भारत की सख्त कूटनीति :
भारत इस बार केवल सैन्य जवाब तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है। FATF, IMF और वर्ल्ड बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग कर भारत यह स्पष्ट संकेत देना चाहता है कि आतंक को शह देने वाले देशों के लिए अब दुनिया में कोई जगह नहीं बची है।
आने वाले हफ्तों में भारत की यह कूटनीतिक पहल वैश्विक मंच पर कितना असर डालती है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान के लिए आगे की राह और कठिन होने जा रही है।

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