Kanwar Lal Meena Falls in BJP Shake-Up

5/23/2025 2:48:08 PM
राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब बारां जिले की अंता सीट से बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। यह फैसला उनके खिलाफ 20 साल पुराने एक आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद लिया गया है। यह घटनाक्रम राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, और कांग्रेस ने इसे अपनी “राजनीतिक नैतिक जीत” बताया है।
कंवरलाल मीणा को कोर्ट से तीन साल की सजा :
यह मामला वर्ष 2005 का है, जब दांगीपुरा-राजगढ़ मोड़ पर उपसरपंच चुनाव के बाद दोबारा मतदान की मांग को लेकर स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे थे। उसी दौरान तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता वहां पहुंचे थे। आरोप है कि विधायक कंवरलाल मीणा ने उस समय एसडीएम की कनपटी पर पिस्तौल तान दी थी और जान से मारने की धमकी दी थी।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दो दिन पहले कंवरलाल मीणा को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद उन्हें 21 मई तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था, जिसे मानते हुए उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

विधानसभा सदस्यता रद्द, कांग्रेस ने ली जिम्मेदारी का श्रेय :
सजा सुनाए जाने के 23 दिन बाद आखिरकार उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को अपने राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया है। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कांग्रेस के भारी दबाव और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली द्वारा सुप्रीम कोर्ट में 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' की अर्जी पेश करने के बाद आखिरकार बीजेपी के सजायाफ्ता विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द करनी पड़ी। लोकतंत्र में संविधान सर्वोपरि है।”
डोटासरा ने विधानसभा अध्यक्ष पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद 23 दिनों तक सदस्यता रद्द नहीं की गई, जो साफ तौर पर बीजेपी की सरकार और विधानसभा सचिवालय की निष्क्रियता को दर्शाता है।
“कानून सबके लिए समान” — कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक विधायक की सदस्यता से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख और संविधान की गरिमा से जुड़ा हुआ है। डोटासरा ने कहा, “बीजेपी को यह याद दिलाते रहेंगे कि इस देश में दो कानून नहीं हो सकते – एक उनके लिए और दूसरा आम जनता के लिए। कानून और संविधान की पालना हर किसी पर बराबर लागू होनी चाहिए।”
बीजेपी की प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई :
बीजेपी की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, पार्टी के सूत्रों का कहना है कि वे कानूनी सलाह लेने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे। राजस्थान में इस समय विधानसभा चुनावों की चर्चा शुरू हो चुकी है और ऐसे में यह घटनाक्रम बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। कंवरलाल मीणा जैसे वरिष्ठ नेता की सदस्यता रद्द होने से पार्टी की छवि और राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक फैसलों का सीधा असर राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होना तय है खासकर तब, जब विपक्ष इसे संविधान और न्याय की जीत के रूप में प्रचारित कर रहा है।
Editorial

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