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सिंधु जल पर भारत की चाल से तिलमिलाया पाकिस्तान..
By EditorialPublished on
पाकिस्तान में सिंधु जल समझौते को लेकर घबराहट बढ़ती जा रही है। ताज़ा बयान में पाकिस्तानी सांसद सैयद अली ज़फर ने चेतावनी दी है कि अगर भारत द्वारा सिंधु नदी के पानी की आपूर्ति रोकी गई तो पाकिस्तान को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इंडस बेसिन को देश की लाइफलाइन बताते हुए कहा कि अगर यह मुद्दा हल नहीं हुआ तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। भारत की नई जल नीति और सिंधु नदी पर बन रहे बांधों को लेकर पाकिस्तान की संसद में चिंता की लहर दौड़ गई है।

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भारत द्वारा सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को अस्थायी रूप से स्थगित करने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी द्वारा दिए गए उग्र बयान के बाद अब पाकिस्तान के ही एक वरिष्ठ सांसद सैयद अली ज़फर ने हालात की गंभीरता को स्वीकार करते हुए इसे “वॉटर बम” करार दिया है।
"21वीं सदी की जंगें पानी पर होंगी"
पाकिस्तानी सीनेट में 23 मई को सिंधु जल मुद्दे पर हुई बहस के दौरान सीनेटर सैयद अली ज़फर ने स्पष्ट कहा कि यह केवल पर्यावरण या आपूर्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और जीवन-मरण का मुद्दा है। उन्होंने कहा, “यह एक जंग है जो हमारे ऊपर थोपी गई है। आतंकवाद जितना अहम मुद्दा है, पानी उससे कम नहीं है। आने वाले समय में जंगें पानी को लेकर ही होंगी, और यह बात अब सच होती दिख रही है।”
"अगर हल नहीं किया तो हम भूखे मर सकते हैं"
ज़फर ने पाकिस्तानी संसद को आगाह करते हुए कहा कि पाकिस्तान एक वॉटर स्ट्रेस्ड नेशन है और तेजी से वॉटर स्कार्सिटी की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी 90% फसलें इंडस वॉटर बेसिन पर निर्भर हैं। तीन चौथाई पानी बाहर से आता है, और 10 में से 9 पाकिस्तानियों की ज़िंदगी इस पानी पर टिकी है। अगर यह मुद्दा जल्द हल नहीं हुआ तो मुल्क को भूखे मरने से कोई नहीं बचा सकता।”
"वॉटर बम हमारे ऊपर गिर चुका है"
सीनेटर ने चेतावनी दी कि यदि इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया तो इसके परिणाम परमाणु युद्ध से भी विनाशकारी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह एक वॉटर बम है जो हमारे ऊपर गिर चुका है। हमें मिलकर इसे डिफ्यूज करना है। पाकिस्तान के जितने पावर प्रोजेक्ट्स, डैम्स, और सिंचाई योजनाएं हैं – सब इसी पानी पर आधारित हैं। यह हमारी ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है।”
भारत की नीति पर सवाल :
ज़फर ने भारत पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के निर्माण के समय ही भारत ने यह नीति बना ली थी कि पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना है। उन्होंने आरोप लगाया, “जब पाकिस्तान बना तो रेडक्लिफ ने फिरोजपुर हेडवर्क्स पाकिस्तान को देने की बात कही थी, लेकिन अंतिम समय पर लाइन बदल दी गई। कश्मीर विवाद को भी ज़िंदा रखने का बड़ा कारण पानी ही है।”
सिंधु जल समझौता – एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :
1950 के दशक में विश्व बैंक की मध्यस्थता से बना सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे को लेकर बना एक स्थायी समाधान माना गया था। इसके तहत भारत को पूर्वी नदियों (सतलुज, ब्यास, रावी) पर पूर्ण अधिकार मिला जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के अधिकतर जल का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन हाल के वर्षों में पाकिस्तान द्वारा बार-बार भारत विरोधी गतिविधियों और सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत में यह मांग जोर पकड़ रही थी कि इस समझौते की समीक्षा की जाए।
भारत द्वारा समझौते को अस्थायी रूप से स्थगित करने की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान में पानी को लेकर चिंता की लहर दौड़ गई है। सैयद अली ज़फर जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयान यह दिखाते हैं कि पाकिस्तान अब पानी की कूटनीति से दबाव महसूस करने लगा है। आने वाले समय में यह मुद्दा सिर्फ पर्यावरण या कृषि नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामरिक संघर्ष का केंद्र बन सकता है।

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