✕
आम के लिए अंबानी का लगाव! वजह जानकर उड़ जाएंगे होश
By EditorialPublished on
देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी सिर्फ कारोबार ही नहीं, बल्कि खेती-बाड़ी और खासतौर पर आमों के लिए भी अपनी खास पसंद के लिए जाने जाते हैं। अब एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबका ध्यान खींचा है। बताया जा रहा है कि अंबानी परिवार के पास महाराष्ट्र में एक ऐसा विशाल आम का बाग है जो करीब 600 एकड़ में फैला हुआ है। इस बाग में 1.3 लाख से भी ज्यादा आम के पेड़ हैं, जिनमें 200 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। इनमें केसर, अलफांसो, रत्ना, सिंधु, नीलम और आम्रपाली जैसी प्रीमियम वैरायटी शामिल हैं। यह न सिर्फ अंबानी परिवार

x

जब भी मुकेश अंबानी का नाम सामने आता है, तो लोगों के ज़हन में सबसे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज, जियो, पेट्रोलियम या रिटेल सेक्टर की तस्वीर उभरती है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) दुनिया की सबसे बड़ी आम एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों में से एक है। जी हां, वही रिलायंस, जो देश की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, वह अब कृषि क्षेत्र, खासकर मैंगो फार्मिंग में भी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी है।
पर्यावरण संकट से उपजा आम का साम्राज्य :
इस अनोखी कहानी की शुरुआत हुई थी साल 1997 में, जब रिलायंस को गुजरात के जामनगर स्थित अपनी रिफाइनरी परियोजना के कारण गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परियोजना स्थल पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनियों और स्थानीय विरोधों के चलते रिलायंस ने इस संकट का एक अभिनव और स्थायी समाधान निकाला—रिफाइनरी के चारों ओर ग्रीन बेल्ट तैयार करना।
इस ग्रीन बेल्ट को सिर्फ पेड़ों से सजाया नहीं गया, बल्कि इसे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार आम के बाग में बदल दिया गया। इस पूरी योजना के पीछे मकसद सिर्फ पर्यावरण को संवारना नहीं था, बल्कि इस जमीन को उत्पादक बनाना भी था। इस फैसले ने एक ऐसी कहानी की नींव रखी, जो आज एक मिसाल बन चुकी है।
600 एकड़ में फैला है धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई :
इस विशाल मैंगो ऑर्चर्ड का नाम रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के नाम पर रखा गया—धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई। यह बाग जामनगर में स्थित है और लगभग 600 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 1.3 लाख से अधिक आम के पेड़ हैं और 200 से ज्यादा किस्मों के आम उगाए जाते हैं।
इस बाग का नामकरण ऐतिहासिक संदर्भों से भी जुड़ा है। मुगल सम्राट अकबर ने 16वीं सदी में एक विशाल आम बाग "लखीबाग" बनवाया था। उसी भावना से प्रेरित होकर इस बाग को यह नाम दिया गया।
वैज्ञानिक तरीके से होती है खेती :
शुरुआत में कई एक्सपर्ट्स को संदेह था कि तेज हवाओं, खारे पानी और मिट्टी की लवणता के चलते यहां खेती संभव नहीं होगी। लेकिन रिलायंस ने आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर इस असंभव को संभव कर दिखाया। ड्रिप इरिगेशन, सॉयल टेस्टिंग, क्लाइमेट-फ्रेंडली किस्मों का चयन और माइक्रो मैनेजमेंट से आज यह फार्म दुनिया के सबसे सफल आम उत्पादन केंद्रों में से एक बन गया है।
देसी ही नहीं विदेशी किस्मों का भी जलवा :
यहां सिर्फ भारत की पारंपरिक किस्में जैसे केसर, अलफांसो, रत्ना, सिंधु, नीलम और आम्रपाली ही नहीं उगाई जातीं, बल्कि अमेरिका और इजरायल की खास किस्में भी बाग की शान बढ़ा रही हैं।
इनमें अमेरिका की टॉमी एटकिंस, केंट और इजरायल की लिली, कीट और माया किस्में शामिल हैं। यही वजह है कि रिलायंस के इस आम फार्म की पैदावार की डिमांड अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट जैसे देशों में जबरदस्त है।
दुनिया के सामने पेश किया खेती का आदर्श मॉडल :
रिलायंस का यह प्रोजेक्ट सिर्फ कॉर्पोरेट ग्रीन इनिशिएटिव का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल इनोवेशन कैसे साथ-साथ चल सकते हैं। यह फार्म न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया भी बना है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जब कोई बड़ा कॉर्पोरेट समूह चाहे, तो वह खेती को सिर्फ व्यवसाय नहीं, एक जिम्मेदारी मानकर भी आगे बढ़ सकता है। रिलायंस का यह कदम खासतौर पर ऐसे समय में प्रेरणा देता है, जब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसे मुद्दे वैश्विक चिंता का विषय बन चुके हैं।
अंबानी और आम का यह कनेक्शन जितना हैरान करने वाला है, उतना ही प्रेरणादायक भी। यह दिखाता है कि बड़े कॉर्पोरेट सिर्फ मुनाफा कमाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश की भूमि, पर्यावरण और कृषि को भी संवार सकते हैं। आज जब देश में जैविक खेती, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और निर्यात बढ़ाने की बात हो रही है, तब धीरूभाई अंबानी लखीबाग अमराई एक आदर्श मॉडल बनकर सामने आता है। और शायद यही वजह है कि अब अंबानी का नाम सिर्फ इंडस्ट्री और टेलीकॉम से नहीं, बल्कि 'आम' बातों में भी खास बन गया है।

Editorial
Next Story
Related News
X
