Political Twist: Shahbaz Seeks Imran Khan’s Backing
5/2/2025 3:10:11 PM
भारत के साथ बढ़ते तनाव और अंदरूनी विद्रोह की आहट ने पाकिस्तान की राजनीति में नाटकीय मोड़ ला दिया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सख्त प्रतिक्रिया और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका से पाकिस्तान सरकार और सेना की नींद उड़ गई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को जेल में बंद अपने कट्टर विरोधी और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मदद मांगनी पड़ी है।
इमरान खान से गुपचुप संपर्क, 4 पूर्व सैन्य अफसरों को भेजा गया :
सूत्रों के मुताबिक, शहबाज और मुनीर ने चार पूर्व सैन्य अधिकारियों को इमरान खान के पास भेजा है, ताकि वह अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को सड़कों से हटाने और विशेष रूप से सिंध और कराची में हो रहे प्रदर्शनों को रोकने के लिए राजी करें। यह वही इमरान खान हैं जिन्हें साल 2019 में ISI प्रमुख रहते हुए आसिम मुनीर ने हटाने की साजिश रची थी। अब परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि मुनीर को उसी इमरान से बातचीत की पहल करनी पड़ी है।
भारत के खौफ से हिल गया पाकिस्तान :
भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। सबसे बड़ा झटका सिंधु जल संधि को रद्द करना था, जिससे पाकिस्तान की जल आपूर्ति और कृषि पर सीधा असर पड़ा है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है।
पाकिस्तानी प्रशासन को डर है कि भारत की तरफ से सैन्य कार्रवाई हो सकती है। कराची, सिंध और लाहौर जैसे शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, बंकर निर्माण और सायरन सिस्टम को सक्रिय किया गया है, जिससे जनता में दहशत का माहौल बन गया है।
सियासी समीकरण में नया मोड़ :
इमरान खान और आसिम मुनीर के बीच वर्षों पुरानी रंजिश जगजाहिर है। ISI प्रमुख रहते हुए मुनीर को इमरान खान ने समय से पहले हटाया था। इसके बाद सत्ता में लौटने के बाद मुनीर ने इमरान को जेल भिजवाने तक का खेल रचा। लेकिन अब वही सेना प्रमुख राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए इमरान का सहारा लेने पर मजबूर हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम पाकिस्तान की सियासत में बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर इमरान खान इस संकट में सरकार और सेना को राहत देते हैं, तो उनकी शर्तों पर राजनीतिक समझौता हो सकता है—जिससे सत्ता संतुलन बदल सकता है।भारत के आक्रामक रुख और पाकिस्तान के भीतर गहराते असंतोष ने शहबाज शरीफ सरकार और फौज को घुटनों पर ला दिया है। इमरान खान के साथ समझौते की कोशिश इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अब राजनीतिक अस्तित्व और बाहरी दबाव के बीच फंसा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इमरान खान इस मौके का फायदा उठाकर एक बार फिर सत्ता के करीब पहुंचेंगे या यह मुलाकात सिर्फ एक मजबूरी भरा कदम साबित होगी।
Editorial

Editorial

Next Story