Madhavan Targets NCERT; ‘Where’s Our History in the Books?
5/2/2025 1:45:31 PM
अपनी हालिया फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2’ की सफलता के बीच अभिनेता आर. माधवन एक और वजह से सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने स्कूली इतिहास की किताबों को लेकर सवाल उठाए हैं। माधवन ने दावा किया कि भारतीय इतिहास को पाठ्यपुस्तकों में असंतुलित तरीके से पेश किया गया है – जहां मुगल साम्राज्य पर आठ अध्याय हैं, वहीं चोल जैसे प्राचीन और समृद्ध साम्राज्य पर सिर्फ एक चैप्टर दिया गया है। स्कूली इतिहास की किताबों में क्या पढ़ाया जाए और कितना पढ़ाया जाए – इस सवाल को लेकर अभिनेता आर. माधवन ने एक नई बहस को हवा दे दी है। एनसीईआरटी (NCERT) के सिलेबस को लेकर उठे विवाद के बीच माधवन ने पूछा है कि “मुगलों पर 8 चैप्टर और चोल साम्राज्य जैसे भारतीय शासकों पर सिर्फ एक चैप्टर क्यों?” उनका यह सवाल इतिहास की पढ़ाई में संभावित पक्षपात को लेकर गंभीर चिंता जाहिर करता है।
"इतिहास का यह चुनाव किसने किया?" – माधवन का तीखा सवाल :
एक इंटरव्यू में माधवन ने कहा, "यह कहने पर मुझे परेशानी हो सकती है, लेकिन जब मैंने स्कूल में इतिहास पढ़ा था, तो मुगलों पर आठ चैप्टर, हड़प्पा-मोहनजोदड़ो पर दो, अंग्रेजों और स्वतंत्रता संग्राम पर चार और चोल, पांड्य, पल्लव, चेर जैसे साम्राज्यों पर केवल एक चैप्टर था।" उन्होंने पूछा, "यह फैसला किसने किया कि क्या पढ़ाया जाएगा और कितना पढ़ाया जाएगा? ये किसका नैरेटिव है?"
चोल साम्राज्य को लेकर नाराजगी :
माधवन ने इस बात पर निराशा जाहिर की कि चोल साम्राज्य, जो लगभग 2,400 वर्षों तक टिका रहा और जिसका व्यापार रोम तक फैला था, को स्कूली किताबों में बमुश्किल जगह दी गई। उन्होंने बताया कि इस साम्राज्य का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव कोरिया तक था, फिर भी यह समृद्ध इतिहास एक ही अध्याय में समेट दिया गया।
NCERT पर बढ़ता विवाद :
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एनसीईआरटी ने कक्षा 7 की इतिहास की किताबों से मुगल और दिल्ली सल्तनत जैसे विषयों को हटाने का निर्णय लिया है। इनकी जगह अब सरकारी योजनाओं, भूगोल और सामाजिक अभियानों पर आधारित नए पाठ शामिल किए गए हैं। इस बदलाव ने शिक्षाविदों, इतिहासकारों और आम लोगों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है।
'केसरी चैप्टर 2' और इतिहास को दिखाने की जिम्मेदारी :
माधवन ने अपनी फिल्म ‘केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग’ का बचाव करते हुए कहा कि फिल्म इतिहास को एक अधिक संपूर्ण दृष्टिकोण से दर्शाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा, "हमें इतिहास की सच्चाई दिखाने के लिए दोष मत दीजिए। यह फैक्ट है।" फिल्म में माधवन ने एक ब्रिटिश वकील की भूमिका निभाई है जो जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद न्याय के लिए कोर्ट रूम में लड़ने वाले सर सी. शंकरन नायर के खिलाफ खड़ा होता है।
ब्रिटिश नैरेटिव और इतिहास की सफेदी :
माधवन ने ब्रिटिश औपनिवेशिक दृष्टिकोण के तहत तैयार इतिहास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसे मुद्दों में स्वतंत्रता सेनानियों को "आतंकवादी और लुटेरा" कह कर पेश किया गया। "जनरल डायर और उसकी पोती तक हमें आतंकवादी कहते हैं, आप इतिहास को किस हद तक सफेद कर सकते हैं?" आर. माधवन का यह बयान न सिर्फ एक अभिनेता की सोच है, बल्कि एक नागरिक की गंभीर चिंता भी दर्शाता है। इतिहास की सही और संतुलित प्रस्तुति को लेकर अब बहस एक बार फिर गरमा गई है और शायद यह बदलाव की शुरुआत भी बन सकती है।
Editorial

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