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नई दिल्ली। पतंजलि समूह की तकनीकी शाखा भरुवा सॉल्यूशंस ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने हाल ही में एआई-संचालित, बहुभाषी बैंकिंग ईआरपी सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा की है। यह अगली पीढ़ी का प्लेटफॉर्म छोटे बैंकों, क्षेत्रीय बैंकों और सहकारी संस्थानों को डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
भरुवा का यह अत्याधुनिक सीबीएस प्लेटफॉर्म (बी-बैंकिंग) भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की चार बड़ी चुनौतियों का समाधान करता है। पहली और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है भाषा की बाधा। भारत की भाषाई विविधता के बावजूद अधिकांश बैंकिंग सेवाएँ अब तक केवल अंग्रेजी में उपलब्ध थीं। भरुवा का यह समाधान बैंकों को अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं में भी सेवा देने की सुविधा प्रदान करता है, जैसे गुजरात में गुजराती और पंजाब में पंजाबी।
सुरक्षा इस सॉफ्टवेयर का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है। प्लेटफॉर्म में अत्याधुनिक एआई और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल हैं जो डेटा, लेनदेन और डिजिटल इंटरैक्शन के लिए व्यापक सुरक्षा प्रदान करते हैं। तीसरी चुनौती प्रक्रिया दक्षता की है जिसे इस सिस्टम में एंड-टू-एंड बैंकिंग ऑटोमेशन के माध्यम से संबोधित किया गया है। इसमें एपीआई बैंकिंग, एमआईएस, एचआरएमएस और ईआरपी मॉड्यूल जैसी अनेक सुविधाएँ शामिल हैं।
चौथी और अंतिम चुनौती विनियामक अनुपालन की है। यह सॉफ्टवेयर आधिकारिक भाषा अधिनियम 1963 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है, जो वित्तीय संस्थानों में द्विभाषी सॉफ्टवेयर के लिए सरकारी आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करता है।
पतंजलि समूह के संस्थापक और प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण जी ने इस अवसर पर कहा, "भारत एक बहुभाषी देश है, फिर भी हमारा बैंकिंग बुनियादी ढांचा मुख्य रूप से अंग्रेजी में ही संचालित होता है, जिससे बड़ी आबादी बैंकिंग सेवाओं से दूर रह जाती है। भरुवा सॉल्यूशंस का यह उत्पाद तकनीकी रूप से उन्नत, कार्यात्मक रूप से व्यापक और भाषाई रूप से समावेशी है।"
उन्होंने आगे कहा, "एआई और मशीन लर्निंग के इस युग में, यह समय की मांग है कि हमारे ग्रामीण, अर्ध-शहरी, सहकारी और छोटे वित्तीय संस्थानों को भी बड़े सार्वजनिक और निजी बैंकों के समान तकनीक मिले। यह पहल भारत को हर तरह से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, भरुवा सॉल्यूशंस ने नेचुरल सपोर्ट कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। यह कंपनी द्विभाषी बैंकिंग क्षेत्र में 1999 से काम कर रही है और 5,000 से अधिक बैंक शाखाओं को स्वचालित बना चुकी है।
दोनों कंपनियों का लक्ष्य एक समग्र "बैंक इन ए बॉक्स" समाधान प्रदान करना है, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी बैंकिंग सेवाओं को एकीकृत करता है। यह कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) के साथ-साथ इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग, एआई-संचालित खोज, ईकेवाईसी, सीकेवाईसी और एसएमएस बैंकिंग जैसी सेवाओं का समर्थन करता है।
इस नवीन सॉफ्टवेयर से राज्य सहकारी बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों, एनबीएफसी और भारत के अन्य वित्तीय संस्थानों को लाभ होगा। कंपनी का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इस समाधान को पेश करना है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां बहुभाषी बैंकिंग की आवश्यकता है।
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