SIT जांच का आदेश; विजय शाह को SC से फौरी राहत !
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा की जा रही जांच की नियमित निगरानी आवश्यक है। अदालत ने कहा कि एसआईटी को समय-समय पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें पहली रिपोर्ट 28 मई को प्रस्तुत की जाए। यह आदेश एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है।
_202505191516338281.png)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की उस माफी को अस्वीकार कर दिया, जो उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में मांगी थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईटी समय-समय पर जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी, जिसकी पहली रिपोर्ट 28 मई को दी जानी है।
सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने की। इस दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि इंदौर पुलिस ने पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच प्रारंभ हो चुकी है। साथ ही, तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक एसआईटी गठित की जा रही है, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल होंगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक का अधिकारी करेगा और सभी सदस्य मध्य प्रदेश कैडर के बाहर के होंगे, जिससे निष्पक्षता बनी रहे।
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामाकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इससे पहले 16 मई को एफआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और मामले की सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख तय की थी। विजय शाह ने 14 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी थी।
विजय शाह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह पेश हुए। उन्होंने कहा कि शाह अपने बयान पर "दिल से क्षमा" मांगते हैं। लेकिन जस्टिस सूर्यकांत ने इस माफी को सतही और औपचारिक बताते हुए अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, "आपकी माफी कहां है? कई लोग सिर्फ कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए माफी मांगते हैं। हमें ऐसी घड़ियाली माफी नहीं चाहिए।"
कोर्ट ने कहा कि एक मंत्री का आचरण आदर्श होना चाहिए और उन्हें अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सेना का देश में विशेष सम्मान है और इस प्रकार के बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
हालांकि कोर्ट ने विजय शाह को गिरफ्तारी से राहत दी है, लेकिन उन्हें जांच में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को निष्पक्ष न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

