अमेरिका का लापता परमाणु बम; रहस्य जो आज भी सुलझा नहीं!
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव ने एक बार फिर दुनिया को न्यूक्लियर युद्ध के खतरे की याद दिला दी। दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं, और आशंका थी कि अगर हालात बिगड़े, तो पाकिस्तान हताशा में न्यूक्लियर बटन दबा सकता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है। परमाणु हथियार का उपयोग अब भी दुनिया की सबसे बड़ी और गंभीर जिम्मेदारियों में गिना जाता है।
इतिहास में अब तक सिर्फ एक बार परमाणु हथियार का उपयोग हुआ है, जब अमेरिका ने 1945 में जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका का एक और खतरनाक परमाणु बम आज भी समुद्र की गहराइयों में लापता है, और 66 साल बाद भी उसकी तलाश जारी है?
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1958: जब समुद्र में गिर गया था परमाणु बम :
यह घटना 5 फरवरी 1958 की है, जब अमेरिका के दो सैन्य विमान — एक B-47 बॉम्बर और एक F-86 फाइटर जेट — प्रशिक्षण मिशन के दौरान आपस में टकरा गए। उस समय B-47 बॉम्बर में एक जीवित परमाणु बम भी लोड था। टकराव के बाद पायलट ने निर्णय लिया कि यदि वह बम के साथ लैंड करने की कोशिश करेगा, तो रनवे और आसपास का क्षेत्र तबाह हो सकता है। लिहाज़ा, उसने लगभग 7200 फीट की ऊँचाई से परमाणु बम को समुद्र में गिरा दिया।
100 से ज़्यादा गोताखोर भी नहीं ढूंढ पाए बम :
घटना के बाद अमेरिकी नौसेना ने इस बम को खोजने के लिए एक विशाल अभियान चलाया। 100 से ज़्यादा नौसैनिक गोताखोरों की टीम को दो महीनों तक खोजबीन में लगाया गया, लेकिन बम का कोई सुराग नहीं मिला। आज, छह दशकों से ज्यादा बीतने के बाद भी वह परमाणु बम समुद्र में कहां है, यह किसी को नहीं पता।
अब भी बनी हुई है चिंता :
इस बम को लेकर आज भी चिंता बनी हुई है कि क्या वह कभी विस्फोट कर सकता है या पर्यावरणीय खतरा बन सकता है। हालांकि अमेरिकी सरकार का दावा है कि यह बम ‘नॉन-न्यूक्लियर’ मोड में था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी ताकत और मौजूदगी आज भी एक रहस्यमयी खतरा बनी हुई है।
Editorial

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