भारत का डेलीगेशन दुनिया भर में खोलेगा पाकिस्तान की पोल!
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद पर सख्त संदेश देने की दिशा में भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक कदम उठाने जा रहा है। केंद्र सरकार ने सात सांसदों के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो 23 मई से शुरू होकर 10 दिनों तक कई प्रमुख देशों का दौरा करेगा। इस डेलीगेशन का मकसद है– पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए फेक नैरेटिव का खंडन करना और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती से वैश्विक मंच पर रखना।
जामा मस्जिद में बीजेपी नेता; गले मिले शाही इमाम से!
इन दिग्गज नेताओं के हाथ में जिम्मेदारी :
प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई 7 प्रमुख नेताओं के हाथ में होगी:
  1. शशि थरूर (कांग्रेस): अमेरिका
  2. रविशंकर प्रसाद (बीजेपी): मिडिल ईस्ट
  3. कनिमोझी करुणानिधि (डीएमके): रूस और स्पेन
  4. सुप्रिया सुले (एनसीपी): दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, केन्या
  5. संजय कुमार झा (जेडीयू): जापान और मलेशिया
  6. बैजयंत पांडा (बीजेपी): वेस्टर्न यूरोप
  7. श्रीकांत शिंदे (शिवसेना): यूएई और अफ्रीकी देश
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन होंगे शामिल ?
इस डेलीगेशन में 20 से ज्यादा सांसद शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख नाम हैं: अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, मनीष तिवारी, असदुद्दीन ओवैसी, अमर सिंह, राजीव प्रताप रूडी, प्रियंका चतुर्वेदी, सलमान खुर्शीद, बृज लाल और विक्रमजीत साहनी। हालांकि, टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने स्वास्थ्य कारणों से शामिल होने में असमर्थता जताई है।
केंद्र सरकार की कूटनीतिक रणनीति :
इस पूरी पहल की निगरानी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चलाए जा रहे फेक प्रचार का जवाब अब तथ्यों, दस्तावेज़ों और सांसदों की मौजूदगी के ज़रिए दिया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि भारत ने आम नागरिकों और मस्जिदों को निशाना बनाया, जबकि भारतीय सेना ने यह स्पष्ट किया कि सभी 9 टारगेट आतंकवादी ठिकाने थे, जिनमें से 5 पीओके और 4 पाकिस्तान के भीतर थे।
10 दिनों, 5 देशों का दौरा – पाकिस्तान की होगी बोलती बंद :
प्रत्येक सांसद प्रतिनिधिमंडल लगभग 5 देशों का दौरा करेगा, और भारत की ओर से यह संदेश देगा कि आतंकवाद पर अब कोई समझौता नहीं होगा। यह डेलीगेशन न केवल भारत की नीति को मजबूती देगा बल्कि पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर अलग-थलग करने की दिशा में एक निर्णायक कूटनीतिक कदम साबित हो सकता है।
Editorial

Editorial

Next Story