दिल्ली एनसीआर में मौसम का मिजाज बदला।
धूल भरी आंधी ने बढ़ाई परेशानी, वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंची।

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दिल्ली एनसीआर में मौसम का मिजाज अचानक से बदल गया है। बीती रात आईजीआई एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी घटकर 1200 मीटर हो गई, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। धूल भरी आंधी के कारण आसमान में धुएं की चादर छा गई, जिससे वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
धूल भरी आंधी के कारण
दिल्ली एनसीआर में धूल भरी आंधी के कारण वायु गुणवत्ता खराब हो गई है। हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटे रही, जिससे धूल के कण वातावरण में फैल गए। धूल के कारण PM 10 की मात्रा बढ़ गई, जिससे औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब श्रेणी में पहुंच गया।
वायु गुणवत्ता का बिगड़ता हाल
दिल्ली एनसीआर में वायु गुणवत्ता का हाल बिगड़ता जा रहा है। 24 घंटे पहले ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हुई थी, लेकिन अब हालत एकदम अलग है। धूल के कारण AQI में बढ़ोतरी हुई है, जो अब खराब श्रेणी में पहुंच गया है। पहले AQI 135 था, जो मध्यम श्रेणी में आता था, लेकिन अब यह 249 हो गया है, जो खराब श्रेणी में आता है।
क्या है AQI?
AQI एक सूचकांक है जो वायु गुणवत्ता को मापता है। यह सूचकांक 0 से 500 के बीच होता है, जिसमें 0-50 की श्रेणी अच्छी वायु गुणवत्ता को दर्शाती है, जबकि 401-500 की श्रेणी गंभीर वायु गुणवत्ता को दर्शाती है। दिल्ली एनसीआर में AQI खराब श्रेणी में पहुंच गया है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
वायु गुणवत्ता के खराब होने से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। धूल के कणों के कारण श्वसन समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि अस्थमा और ब्रोंकाइटिस। वायु गुणवत्ता के खराब होने से आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
सुधार की उम्मीद
हालांकि, धूल भरी आंधी के बाद मौसम में सुधार की उम्मीद है। हवा की गति और दिशा के कारण धूल के कण वातावरण से बाहर निकल सकते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। लेकिन, अभी भी लोगों को सावधानी बरतनी होगी और वायु गुणवत्ता के प्रति सचेत रहना होगा।
दिल्ली एनसीआर में मौसम का मिजाज अचानक से बदल गया है, जिससे वायु गुणवत्ता खराब हो गई है। धूल भरी आंधी के कारण PM 10 की मात्रा बढ़ गई है, जिससे AQI खराब श्रेणी में पहुंच गया है। लोगों को सावधानी बरतनी होगी और वायु गुणवत्ता के प्रति सचेत रहना होगा। सरकार और प्रशासन को भी वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठाने होंगे।
Editorial

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