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वकील की दलील पर SC हैरान; ‘ये स्क्रिप्ट कहां से लिखते हो?’
By EditorialPublished on
सुप्रीम कोर्ट ने 43 रोहिंग्या लोगों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र में छोड़ने के आरोप पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता मोहम्मद इस्माइल की अर्जी को बिना पुख्ता सबूतों के दाखिल बताते हुए खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया

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सुप्रीम कोर्ट ने 43 रोहिंग्या लोगों को अंतरराष्ट्रीय समुद्र में छोड़ने के आरोप पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता मोहम्मद इस्माइल की अर्जी को "बिना पुख्ता सबूतों के दाखिल" बताते हुए खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भारत सरकार ने 43 रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरन म्यांमार निर्वासित करते हुए उन्हें समुद्र में फेंक दिया, और वे लोग लाइफ जैकेट पहनकर तैरते हुए म्यांमार पहुंचे।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच में शामिल जस्टिस सूर्यकांत ने इस दावे को पूरी तरह काल्पनिक और कहानीबाज़ी करार दिया। उन्होंने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्विस से तीखा सवाल पूछा, "आप हर बार ऐसी गढ़ी हुई कहानियां कहां से लाते हैं? क्या आपका मुवक्किल घटनास्थल पर खुद मौजूद था? अगर हां, तो वो दिल्ली कैसे लौट आया? या वो दिल्ली से सैटेलाइट के जरिए सब देख रहा था?"
गोंजाल्विस ने संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में इन लोगों को पीड़ित शरणार्थी माना गया है और जबरन निर्वासन न करने की सिफारिश की गई है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने पलटवार किया, "भारत से बाहर बैठे लोग हमारी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की नीतियों में बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि भारत सरकार ने पहले बांग्लादेश के चकमा शरणार्थियों को नागरिकता दी थी, तो रोहिंग्याओं को क्यों नहीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि "चकमा मामले में सरकार ने खुद पहल की थी और उन्हें आश्वासन दिया गया था। इस केस में ऐसा कोई आधार नहीं है।"
गोंजाल्विस ने अदालत से अपील की कि रोहिंग्याओं के निर्वासन पर रोक लगाई जाए, नहीं तो ऐसी घटनाएं दोबारा होंगी। लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि इस मांग पर फिलहाल कोई आदेश नहीं दिया जाएगा।
अंत में कोर्ट ने बताया कि यह मामला अब 31 जुलाई को तीन जजों की बेंच में सुना जाएगा, जिसे चीफ जस्टिस ने पहले ही रिफर किया हुआ है। अभी तक सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया गया है।

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