Political Firestorm; Vijay Shah’s Words Under Fire
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह इन दिनों गंभीर विवादों में घिरे हुए हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के चलते जहां एक ओर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर अब उनका राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव भी कमजोर पड़ता दिख रहा है। इंदौर में हुए एक ताजा घटनाक्रम ने इस बात को और स्पष्ट कर दिया है।
दरअसल, इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के फीनिक्स हॉल में उनके विभाग की एक कार्यशाला आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में लगाए गए होर्डिंग्स पर मंत्री विजय शाह की मुस्कुराती हुई तस्वीरें लगी थीं। लेकिन जैसे ही यह बात इंदौर संभाग के संभागायुक्त दीपक सिंह की नजर में आई, उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मंत्री विजय शाह की तस्वीरें ढक दीं और उनकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें चिपका दीं।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन ?
हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान एक और बड़ी चूक हो गई। प्रोटोकॉल के अनुसार प्रधानमंत्री की तस्वीर हमेशा पहले स्थान पर होनी चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री, मंत्री आदि बाद में आते हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में मंत्री विजय शाह की जगह प्रधानमंत्री की तस्वीर तो लगा दी गई, मगर इससे क्रम में बदलाव हो गया, और प्रधानमंत्री की तस्वीर मुख्यमंत्री मोहन यादव की तस्वीर के बाद दूसरे स्थान पर आ गई। यह एक तरह से प्रोटोकॉल का उल्लंघन था, जिससे अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक असर :
विजय शाह पहले ही अपने बयान को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों के निशाने पर हैं। हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद उनके इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ती जा रही है। अब इंदौर की घटना ने यह साफ कर दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर भी उन्हें लेकर असहजता महसूस की जा रही है।
कार्यशाला में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी पूरे घटनाक्रम के दौरान काफी असहज नजर आए और कई लोग मौके से कन्नी काटते दिखे। इससे साफ है कि विवाद का असर मंत्री की सार्वजनिक छवि और स्वीकार्यता पर पड़ता जा रहा है।
Editorial

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