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‘तुर्किए से व्यापार बंद!’ टिकैत की अपील; मचा सियासी हड़कंप
By EditorialPublished on
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर किसानों की आवाज़ बुलंद करते हुए केंद्र सरकार से तुर्किए के साथ सभी व्यापार समझौतों को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने यह बयान अपने आधिकारिक एक्स (Twitter)

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भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर किसानों की आवाज़ बुलंद करते हुए केंद्र सरकार से तुर्किए के साथ सभी व्यापार समझौतों को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने यह बयान अपने आधिकारिक एक्स (Twitter) हैंडल से पोस्ट करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने तुर्किए को आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश करार दिया और उसके साथ आयात-निर्यात पर सख्ती बरतने की अपील की।
राकेश टिकैत ने विशेष रूप से तुर्किए से सेब के आयात का मुद्दा उठाया। उन्होंने लिखा कि तुर्किए से भारत में आने वाले सस्ते सेब के कारण हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के स्थानीय सेब उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि तुर्किए के सेब भारतीय बाजार में उतरकर न केवल भारतीय किसानों की आजीविका पर असर डालते हैं, बल्कि उस व्यापार से हुई कमाई का इस्तेमाल पाकिस्तान जैसे देशों को हथियार सप्लाई करने में किया जाता है।
टिकैत ने कहा, "भारत सरकार ऐसे देश से आयात व निर्यात पर सख्ती बरते, जो आतंक को बढ़ावा देने वाले देशों को हथियार भेजता है। तुर्किए का सेब भारतीय किसानों की कमर तोड़ रहा है और वहां से कमाई हुई रकम आतंकवाद की फंडिंग में लग रही है।"
किसान संगठनों का मिला समर्थन :
राकेश टिकैत की इस मांग को अन्य किसान संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार को भारतीय किसानों के हित में स्पष्ट और निर्णायक नीति बनानी चाहिए। कई संगठनों ने आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की चेतावनी भी दी है।
तुर्किए के प्रति देश में नाराजगी :
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किए द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता दिए जाने की खबरों से देश में तुर्किए के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ा है। सोशल मीडिया पर भी #BoycottTurkey ट्रेंड कर रहा है और बड़ी संख्या में लोग तुर्किए टूर कैंसिल कर चुके हैं।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस जनभावना और किसान संगठनों की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा, किसानों की आर्थिक स्थिति और विदेश नीति से जुड़ चुका है, जिस पर गंभीर निर्णय की आवश्यकता है।

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