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भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम 'भार्गवास्त्र' का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के गोपालपुर में मंगलवार को किया गया, जिसमें भारतीय सेना की आर्मी एयर डिफेंस (AAD) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस अत्याधुनिक प्रणाली को सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। 'भार्गवास्त्र' को दुश्मन के ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम करने के लिए तैयार किया गया है।

कैसा रहा परीक्षण ?
परीक्षण के दौरान तीन रॉकेट दागे गए। दो परीक्षणों में एक-एक रॉकेट, जबकि तीसरे में दो रॉकेट साल्वो मोड में मात्र दो सेकंड के अंतराल में दागे गए। सभी रॉकेट्स ने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी लॉन्च पैरामीटर सफलतापूर्वक प्राप्त किए। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह सिस्टम एक साथ मल्टीपल ड्रोन्स को पहचानने और नष्ट करने की सक्षम बहुस्तरीय तकनीक से लैस है।
तकनीकी विशेषताएं :
  • ड्रोन पहचान क्षमता: 6 से 10 किमी दूर से
  • हमलावर दूरी: 2.5 किमी
  • घातक दायरा: 20 मीटर
  • सेंसर सिस्टम: EO/IR, रडार, RF रिसीवर
यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोनों को उनकी गति, ऊंचाई और सिग्नल के आधार पर पहचानती है और तत्काल सटीक प्रतिक्रिया देती है। यह 'भार्गवास्त्र' को खास बनाता है।
कई इलाकों में तैनाती के लिए सक्षम :
भार्गवास्त्र को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र तल से लेकर 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सके। यह भारतीय सेना की भौगोलिक विविधताओं के अनुरूप पूरी तरह से फिट बैठता है।
ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में सामरिक महत्व :
यह परीक्षण ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर समझौता हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा तुर्किए और चीन से आयातित ड्रोनों का उपयोग किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में 'भार्गवास्त्र' को भारत की सुरक्षा रणनीति का निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है।

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की सफलता :
‘भार्गवास्त्र’ का विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती देता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की दिशा में एक प्रशंसनीय उपलब्धि है, जो भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का स्वदेशी समाधान प्रस्तुत करता है।
Editorial

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