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पाक के आतंकवाद की टूटी कमर; मोस्ट वांटेड आतंकी ढेर
By EditorialPublished on
भारतीय सेना ने 6-7 मई की आधी रात को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत एक बड़ा और सटीक सैन्य अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में सेना ने पाकिस्तान और पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में स्थित कई आतंकी ठिकानों पर करारा हमला किया। कार्रवाई इतनी गोपनीय और तीव्र थी कि दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सेना के इस साहसिक कदम ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर तक जा सकता है।

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5/10/2025 2:58:41 PM
भारतीय सेना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। 6-7 मई की रात को चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी लॉन्च पैड्स को निशाना बनाकर एक बड़े अभियान को अंजाम दिया। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि इस ऑपरेशन में लगभग 100 आतंकवादी मारे गए, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई शीर्ष कमांडर शामिल हैं।
लश्कर और जैश को सबसे बड़ा झटका :
इस ऑपरेशन में मारे गए आतंकियों की सूची में लश्कर का टॉप कमांडर अबू जुंदाल, मौलाना मसूद अजहर का बहनोई हाफ़िज़ मोहम्मद जमी़ल, और वर्ष 1999 के IC-814 अपहरण कांड का वांछित आतंकी मोहम्मद यूसुफ अज़हर उर्फ उस्ताद जी जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी आतंकियों की भूमिका भारत में आतंकवादी हमलों की योजना बनाने, हथियारों की तस्करी और आतंकियों की भर्ती जैसे गंभीर मामलों में रही है।
मसूद अजहर का पारिवारिक नुकसान :
ऑपरेशन सिंदूर में मसूद अजहर के परिवार से जुड़े 14 लोग मारे गए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मसूद अजहर ने कथित रूप से कहा, "काश ऊपर वाला मुझे भी अपने पास बुला लेता।" यह बयान उसकी हताशा और इस ऑपरेशन की तीव्रता को दर्शाता है।
पाकिस्तान की भूमिका पर फिर उठा सवाल :
इस ऑपरेशन के बाद सामने आई तस्वीरों और रिपोर्ट्स में यह साफ हुआ कि पाकिस्तान ने मारे गए आतंकियों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। अबू जुंदाल के जनाज़े में पाकिस्तान सेना प्रमुख और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ की उपस्थिति, तथा फैसलाबाद और बहावलपुर में पाक सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पाकिस्तान सरकार और सेना आतंकियों को न केवल संरक्षण देती है, बल्कि उन्हें अंदरूनी समर्थन भी प्रदान करती है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा दबाव :
ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने सिर्फ़ आतंकियों को खत्म नहीं किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंक के खिलाफ भारत ‘नो टॉलरेंस’ नीति पर कायम है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि अब पाकिस्तान पर वैश्विक मंचों पर दबाव और अधिक बढ़ेगा।

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