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इल्तिजा मुफ्ती ने सीजफायर को बताया उम्मीद की किरण!
By EditorialPublished on
भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा भारत से युद्धविराम लागू करने का अनुरोध किए जाने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। इल्तिजा ने इस पहल को शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि दोनों देश अब संवेदनशीलता और समझदारी से हालात को संभालेंगे।

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5/10/2025 6:49:25 PM
भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। दोनों देशों के बीच सीजफायर को लेकर औपचारिक सहमति बन गई है। शनिवार, 10 मई को शाम 5 बजे से यह युद्धविराम प्रभावी हो गया है। इस बीच राजनीतिक और सामाजिक हलकों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं, जिनमें सबसे भावुक प्रतिक्रिया पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती की रही।
ट्रंप के पोस्ट पर बोलीं इल्तिजा – 'शांति जिंदाबाद' :
इल्तिजा मुफ्ती ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच पूर्ण और तत्काल युद्धविराम की घोषणा की थी। इस पोस्ट को साझा करते हुए इल्तिजा ने एक छोटा लेकिन भावुक संदेश लिखा – "शांति जिंदाबाद"।
यह बयान उन हजारों लोगों की भावना को दर्शाता है जो युद्ध की आशंका से डरे हुए थे और अब इस पहल से राहत महसूस कर रहे हैं।
सीजफायर की पहल: पाकिस्तान की गुहार, भारत की सहमति :
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) ने भारत से सीजफायर लागू करने का औपचारिक अनुरोध किया था। इसके बाद भारत सरकार ने इस पर विचार कर सहमति दी और शाम पांच बजे से यह सीजफायर लागू कर दिया गया।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुई लंबी बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम पर सहमति जताई है।
इल्तिजा की अपील: पहले भी मांग चुकी थीं शांति की :
गौरतलब है कि इससे पहले भी इल्तिजा मुफ्ती ने कश्मीर में लगातार हो रहे धमाकों और युद्ध के खतरे के बीच शांति की अपील की थी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा था कि शांति की कामना करना राष्ट्रभक्ति की कमी नहीं, बल्कि इंसानियत की पहचान है। इल्तिजा का ‘शांति जिंदाबाद’ कहना सिर्फ एक निजी भावना नहीं, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और सियासी संदेश भी है। यह दिखाता है कि घाटी में रहने वाले लोग युद्ध नहीं, संवाद और समाधान चाहते हैं। भारत-पाकिस्तान के इस सीजफायर समझौते ने जहां एक ओर सीमा पर तैनात सैनिकों को कुछ राहत दी है, वहीं आम नागरिकों के लिए भी यह नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

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