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Raj Thackeray के नेता को धमकी; माहौल तनावपूर्ण!
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर छिड़ा सियासी विवाद अब और अधिक तनावपूर्ण होता जा रहा है। मराठी अस्मिता और पहचान को लेकर बयानबाज़ी और जुबानी जंग के बीच अब यह टकराव व्यक्तिगत हमलों तक पहुँचने लगा है। ताज़ा मामला महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से जुड़ा है, जहाँ पार्टी के मुंबई शहर अध्यक्ष संदीप देशपांडे को धमकी भरा फोन कॉल आया है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मराठी भाषा की गरिमा को लेकर जारी संघर्ष अब नई दिशा लेता दिख

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महाराष्ट्र में मराठी भाषा और अस्मिता को लेकर सियासी घमासान दिन-ब-दिन तेज़ होता जा रहा है। मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद के बीच अब मामला व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच चुका है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के मुंबई शहर अध्यक्ष संदीप देशपांडे को अज्ञात नंबर से फोन कर जान से मारने की धमकी दी गई है। इस घटना से न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है, बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
उत्तर भारतीय विकास सेना की मांग और विवाद की जड़ :
विवाद की शुरुआत उत्तर भारतीय विकास सेना की उस मांग से हुई, जिसमें उन्होंने राज ठाकरे पर हिंदू विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगाया और उनसे माफी की मांग की। साथ ही, मनसे की पार्टी के रूप में मान्यता रद्द करने की भी मांग उठाई गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संदीप देशपांडे ने तीखा बयान देते हुए कहा था, "अगर भैया हमारी पार्टी की मान्यता रद्द करने की बात कह रहे हैं, तो हम विचार करेंगे कि उन्हें मुंबई में रहने दिया जाए या नहीं।"
दादर पुलिस में दर्ज हुई शिकायत :
इसी बयान के कुछ समय बाद देशपांडे को मंगलवार रात करीब 10:15 बजे एक अज्ञात कॉल आया। उन्होंने बताया कि फोन पर मौजूद शख्स ने गंदी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। देशपांडे ने बिना देर किए दादर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अब फोन नंबर को ट्रेस कर रही है।
देशपांडे का बयान: “डरने वाला नहीं हूं”:
धमकी के बाद संदीप देशपांडे ने स्पष्ट कहा कि वह ऐसी हरकतों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कानून के तहत कदम उठाया है और अब पुलिस अपना काम करेगी।
संजय निरुपम की चेतावनी :
इस बीच एकनाथ शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने मनसे कार्यकर्ताओं के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि मराठी भाषा को लेकर आग्रह करना गलत नहीं है, लेकिन यदि इस बहाने उत्तर भारतीयों की पिटाई की जा रही है तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेताया कि मनसे को अब पार्टी की मान्यता रद्द करने वाली याचिका का सामना करना पड़ सकता है। मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद अब सिर्फ भाषाई मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति में टकराव का बड़ा केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और गरमाने की पूरी संभावना है।
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