Rajan : Trade Tensions Favor India
अमेरिका और चीन के बीच चरम पर पहुंच चुके व्यापारिक तनाव के बीच भारत को एक बड़ी रणनीतिक संभावना दिखाई दे रही है। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि यह वही समय है जब भारत को वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए निर्णायक कदम उठाने चाहिए। इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अगर भारत इस वैश्विक अनिश्चितता का सही तरीके से जवाब देता है, तो उसे जबरदस्त फायदा हो सकता है।
राजन ने स्पष्ट रूप से सुझाव दिया कि भारत को अपने पुराने रुख से हटते हुए अमेरिका के साथ व्यापारिक वार्ताएं तेज करनी चाहिए। इससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और देश के निर्यातकों को भी नई संभावनाएं मिलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा की है, जिससे भारत को संभलकर लेकिन सक्रिय रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
वियतनाम पर असर, भारत के लिए अवसर
राजन ने बताया कि जहां वियतनाम जैसे देशों को अमेरिका में अधिक निर्यात करने के कारण बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है, वहीं भारत पर इसका असर सीमित रहेगा क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादा बड़ी और विविध है। उन्होंने कहा, “भारत की जीडीपी की तुलना में अमेरिका को हमारा निर्यात काफी कम है, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।”
संरक्षणवाद छोड़ने की सलाह :
राजन ने भारत सरकार को यह भी सुझाव दिया कि यह समय है जब भारत अपने टैरिफ्स की समीक्षा करे और संरक्षणवादी नीतियों से दूरी बनाकर अधिक खुले और निवेश के अनुकूल माहौल की दिशा में बढ़े। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत में टैरिफ दरों में इजाफा हुआ है, जिसे अब घटाने की जरूरत है, ताकि भारत एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर सके।
रघुराम राजन की यह चेतावनी और सलाह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भारी दबाव में है। उनकी राय में भारत के पास इस संकट को अवसर में बदलने का एक दुर्लभ मौका है—बशर्ते सरकार जल्द और निर्णायक कदम उठाए।
Editorial

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