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Raj Thackeray का प्रहार, UBT गट का सॉल्यूशन प्लान..
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी भाषा एक बार फिर सियासी गर्मी का केंद्र बन गई है। मराठी अस्मिता को लेकर उठे सवालों के बीच राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने एक बार फिर आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। पार्टी की मांग है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा सीखनी चाहिए और इसका सम्मान करना चाहिए। उत्तर भारतीयों को निशाने पर लेते हुए MNS ने सख्त बयानबाज़ी की है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव गट) ने भी मैदान

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महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। एक तरफ जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे मराठी भाषा की अनदेखी को लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए शांति और समझदारी का रास्ता अपनाया है।
उत्तर भारतीयों के लिए ‘मराठी की पाठशाला’ :
शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी अब उत्तर भारतीयों को मराठी सिखाने का अभियान शुरू करेगी। इस पहल के तहत 13 अप्रैल को मुंबई के कांदिवली में ‘मराठी की पाठशाला’ नामक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें पार्टी नेता आदित्य ठाकरे स्वयं शामिल होंगे। इस कदम को मराठी और गैर-मराठी समुदायों के बीच सेतु बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राज ठाकरे की चेतावनी और खुला खत :
वहीं, राज ठाकरे ने हाल ही में दुकानों, कंपनियों और सार्वजनिक स्थानों पर मराठी भाषा को अनिवार्य करने की मांग करते हुए तीखी चेतावनी दी थी कि जो महाराष्ट्र में रहते हैं और मराठी नहीं सीखते, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे। अपने कार्यकर्ताओं को लिखे एक खुले खत में उन्होंने आंदोलन को कुछ समय के लिए रोकने की बात कही, लेकिन यह भी जोड़ा कि "ध्यान भटकने न दिया जाए" और मराठी के मुद्दे पर दबाव बनाए रखा जाए।
हालिया विवाद और हिंसा की घटनाएं :
मार्च और अप्रैल 2025 में मुंबई और लोनावाला सहित कई स्थानों पर मराठी न बोलने वाले कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। अंधेरी के डी-मार्ट, पवई के निजी सुरक्षा गार्ड और लोनावाला के बैंक कर्मचारी के साथ हुए घटनाक्रमों ने इस मुद्दे को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इन घटनाओं में मनसे कार्यकर्ताओं की संलिप्तता बताई जा रही है, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया है। अब सवाल उठता है कि मराठी भाषा को कैसे आगे बढ़ाया जाए।

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