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मुंबई। एक बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने दस्तावेजों की फ्रैंकिंग की अधिकतम सीमा रुपये 10,000 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। वर्तमान सीमा 5 हजार रुपये है।
इसका मतलब यह है कि जिन दस्तावेजों पर 10 हजार रुपये तक की स्टाम्प ड्यूटी देय है, उनकी फ्रैंकिंग नामित राष्ट्रीयकृत और अनुसूचित बैंकों में करवाई जा सकेगी। यह बढ़ोतरी मुंबई के अतिरिक्त मुद्रांक नियंत्रक की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश के आधार पर की गई है। इससे स्टाम्प पेपर बिक्री काउंटरों पर भीड़ भी कम होगी।
हालांकि, ऐसा करते हुए राज्य सरकार ने नागरिकों पर थोड़ा आर्थिक बोझ भी बढ़ा दिया है, क्योंकि प्रति दस्तावेज वर्तमान रु.10 का शुल्क बढ़ाकर रु.15 कर दिया गया है।
राज्य सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी और दस्तावेजों के पंजीकरण से जुड़े कई सुधार लागू किए हैं, जैसे ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा, जिससे “वन स्टेट वन रजिस्ट्रेशन” का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस सुधार के अंतर्गत कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी शहर या कस्बे में हो, घर बैठे पंजीकरण प्रक्रिया में भाग ले सकता है।
फ्रैंकिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कानूनी दस्तावेजों पर बैंकों या अधिकृत एजेंटों द्वारा स्टाम्प लगाया जाता है। यह मशीन से किया गया स्टाम्प इस बात का प्रमाण होता है कि स्टाम्प ड्यूटी अदा कर दी गई है।
Editorial

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