Waqf Law Fallout; Bengal Turns Volatile
देश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 आज यानी 8 अप्रैल से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी करते हुए कानून को प्रभावी कर दिया है। इस कानून के खिलाफ अभी तक सुप्रीम कोर्ट में कुल 15 याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार ने इन याचिकाओं पर आदेश देने से पहले उसकी बात सुने जाने की अपील करते हुए कैविएट दाखिल की है।
किस बात पर उठ रहा है विवाद ?
विवाद की सबसे बड़ी वजह है वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति का प्रावधान। इस संशोधन को लेकर मुस्लिम संगठनों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी हिंद जैसे संगठनों ने इसे मुसलमानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
केंद्र की सफाई और विपक्ष का विरोध :
बीजेपी का कहना है कि यह कानून धर्म से नहीं बल्कि संपत्ति के बेहतर प्रबंधन से जुड़ा है और इसका मकसद महिलाओं व बच्चों को वक्फ संपत्ति से लाभ दिलाना है। पार्टी के अनुसार, इस बिल को विभिन्न समुदायों से चर्चा कर तैयार किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई :
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 15 अप्रैल को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को याचिकाएं सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया है।
बंगाल में हिंसा, पुलिस की गाड़ियां फूंकी गईं :
इस कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और गाड़ियों में आग लगा दी। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल का प्रयोग किया।
नज़रें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर :
वक्फ संशोधन कानून पर देशभर में विरोध जारी है और अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह कानून संवैधानिक है या नहीं।
Editorial

Editorial

Next Story