Black Monday in Shear Market
वैश्विक व्यापारिक तनावों ने अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद ने एशियाई शेयर बाजारों को सबसे पहले निशाना बनाया, जहां सोमवार सुबह ऐसा भूचाल आया कि निवेशकों की नींद उड़ गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 10% तक टूट गया — जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भी 5 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आई गिरावट को विश्लेषक ‘फाइनेंशियल आफ्टरशॉक’ करार दे रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात काबू में नहीं आए, तो यह वैश्विक मंदी की दस्तक बन सकती है।
भारतीय बाजारों में भी हाहाकार :
भारत में भी सोमवार की सुबह निवेशकों पर भारी पड़ी। सेंसेक्स 3379.19 अंक यानी 4.48% की गिरावट के साथ 72,623 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1056.05 अंक यानी 4.61% गिरकर 21,848.40 पर आ गया। बाजार खुलते ही महज 10 सेकेंड में निवेशकों के करीब 19 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। एक्सपर्ट्स इसे 'ब्लैक मंडे' की तरह का दिन मान रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट में सुनामी :
अमेरिका में नैस्डैक पहले ही शुक्रवार को करीब 7% टूटकर बंद हुआ था। वहीं डाओ फ्यूचर्स सोमवार को 900 अंक तक गिर गया, जबकि एसएंडपी और नैस्डैक में 3% की गिरावट जारी रही। जापान के निक्केई इंडेक्स में बाजार खुलते ही 225 अंकों की गिरावट देखी गई। ऑस्ट्रेलिया के S&P 200 इंडेक्स में 6.5% की बड़ी गिरावट आई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.5% गिरकर 2328.52 पर बंद हुआ।
1987 की यादें ताजा, एक्सपर्ट्स का अलर्ट :
सीएनबीसी के मशहूर टीवी होस्ट और मार्केट एक्सपर्ट जिम क्रेमर ने अपने शो Mad Money में आगाह किया कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप ने जवाबी टैरिफ को लेकर दूसरे देशों से संवाद नहीं किया, तो ये स्थिति 1987 जैसे मार्केट क्रैश में बदल सकती है। उन्होंने सोमवार को 'सबसे बुरा दिन' बताया, और कहा कि हालात काबू में नहीं आए तो पूरी दुनिया आर्थिक संकट में जा सकती है। टैरिफ को लेकर बढ़ते तनाव, ग्लोबल पॉलिटिकल अनिश्चितता और गिरते बाजार संकेत दे रहे हैं कि एक बार फिर दुनिया एक गंभीर आर्थिक दौर की ओर बढ़ रही है। निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि यह गिरावट अभी अंत नहीं है—बल्कि यह एक बड़ी चुनौती की शुरुआत हो सकती है।
Editorial

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