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हाई कोर्ट ने कहा , चांदी की थाली में खाना मांगना दहेज नहीं'
By EditorialPublished on
देश की अदालतें कई बार अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चाओं में आती हैं। ऐसा एक किस्सा अब पुणे से सामने आया है। पुणे के एक मामले की सुनवाई करते हुए बंबई हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी की है, जिसकी अब खुब चर्चा हो रही है।
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मुंबई। देश की अदालतें कई बार अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चाओं में आती हैं। ऐसा एक किस्सा अब पुणे से सामने आया है। पुणे के एक मामले की सुनवाई करते हुए बंबई हाई कोर्ट ने एक टिप्पणी की है, जिसकी अब खुब चर्चा हो रही है। दहेज की मांग और शारीरिक उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे पुणे के एक युवा किसान को उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी। मामले में सुनवाई के बाद किसान को आरोपों से बरी करने के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि शादी में चांदी की थाली में भोजन न मिलने की वजह से दूल्हे का नाराज होना एक अस्थायी या तात्कालिक समस्या थी। इसलिए इसे दहेज नहीं कहा जा सकता।
निचली अदालत ने सुनाई थी दो वर्ष की सजा
मामले में याचिकाकर्ता को निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तथा दो वर्ष एवं 500 रुपए जुर्माने की सजा रद्द करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि शादी के दौरान चांदी की थाली में भोजन नहीं मिलने की वजह से याचिकाकर्ता नाराज था। लेकिन उसकी नाराजगी उतने ही वक्त के लिए थी। क्योंकि विवाह के बाद अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी रह रहा था। उनका एक बेटा भी है। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ दहेज की मांग का आरोप साबित नहीं हो पाया है। गौरतलब हो कि इससे पहले इस मामले में सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था, इसलिए याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता पर लगे थे गंभीर आरोप
सरकारी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार ने दहेज के लिए अपनी पत्नी को दो साल तक शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। याचिकाकर्ता पर शादी के दौरान चांदी की प्लेट, सोने की अंगूठियां और अन्य सामान तथा पैसे की मांग करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा याचिकाकर्ता पर अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने तथा उसके परिवार के सदस्यों द्वारा उसे ताना मारने के भी आरोप लगाए गए थे।

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