Country Will Sink!’ ; Trump Fans Say ‘Stocks Soar!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टैरिफ पॉलिसी ने वैश्विक आर्थिक जगत में भूचाल ला दिया है। उनकी घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही अमेरिकी शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, और वॉल स्ट्रीट को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा। इसके बाद चीन ने भी करारा जवाब देते हुए अमेरिकी आयात पर 34% तक का टैरिफ लगा दिया, जिससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर की आशंका और गहरा गई।
S&P 500 कंपनियों का 2.4 ट्रिलियन डॉलर डूबा :
2 अप्रैल को ट्रंप द्वारा 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लागू करने की घोषणा के बाद 4 अप्रैल को चीन ने पलटवार करते हुए अमेरिकी सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया। इस कदम का असर अमेरिका के S&P 500 इंडेक्स पर सीधा पड़ा, जिससे बाजार में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू उड़ गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर ये टकराव आगे भी जारी रहा, तो ग्लोबल मार्केट पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है।
भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा असर :
ट्रंप और चीन की इस टकराहट का असर सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं रहा। भारतीय शेयर बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। NSE निफ्टी 50 और BSE सेंसेक्स दोनों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में घबराहट का माहौल है, और ट्रेड वॉर की आहट से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
"सबसे खराब दिन", बोले ओबामा के आर्थिक सलाहकार :
पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के साथ काम कर चुके प्रसिद्ध हार्वर्ड प्रोफेसर लॉरेंस एच. समर्स ने ट्रंप की नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "आज का दिन शेयर बाजार के लिए बीते पांच वर्षों का सबसे बुरा अनुभव रहा है। आमतौर पर ऐसी गिरावट तब आती है जब कोई वैश्विक संकट हो, जैसे महामारी, युद्ध या बैंकिंग क्रैश। लेकिन इस बार ऐसा एक राष्ट्राध्यक्ष की गलत नीति के चलते हुआ है। यह बेहद खतरनाक है।”
चीन की जवाबी कार्रवाई से बढ़ी चिंता :
ओबामा के लॉन्ग आइलैंड कैंपेन के पूर्व प्रमुख जॉन कूपर ने भी चेतावनी दी कि चीन की जवाबी टैरिफ नीति के बाद गिरावट का यह दौर और लंबा चल सकता है। "ट्रंप का टैरिफ जितना लंबा चलेगा, अमेरिकी जनता पर उतना ही बोझ बढ़ेगा और महंगाई नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी," उन्होंने कहा।
ट्रंप समर्थक बोले- "अब हो रहा है असली सुधार" :
हालांकि ट्रंप की इस नीति को लेकर समर्थन भी मिल रहा है। 'योर वॉयस स्टूडियो' के सीईओ बिल मिशेल ने इसे एक साहसी और जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा, “ट्रंप ने उन देशों को दी जा रही आर्थिक सहायता के पैसे पर रोक लगा दी है, जिसके चलते मार्केट में जो गिरावट आई है वो असल में फर्जी ग्रोथ को खत्म करने की प्रक्रिया है। ये एक ज़रूरी कीमोथेरेपी है ताकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को असली रूप में बेहतर किया जा सके।” डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता को हिला दिया है। जहां एक ओर इसकी वजह से मार्केट में गिरावट और डर का माहौल है, वहीं ट्रंप समर्थक इसे 'बड़ी सफाई' और 'साहसिक सुधार' का नाम दे रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि ये कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बचाएगा या और गहराई तक डुबो देगा।
Editorial

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