✕
AI से Ghibli तक और अब Ghibli से फर्जी पहचान तक!
By EditorialPublished on
पिछले हफ्ते इंटरनेट पर Ghibli स्टाइल की AI इमेजेस की बाढ़ सी आ गई — करीब 700 मिलियन से ज़्यादा तस्वीरें बनाई गईं। लेकिन अब वही AI टूल्स एक खतरनाक मोड़ ले चुके हैं। लोग इन्हीं जनरेटर की मदद से फेक आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने लगे हैं। जहां एक ओर AI की क्रिएटिव ताकत ने सोशल मीडिया पर तहलका मचाया, वहीं दूसरी ओर यह तकनीक अब धोखाधड़ी और डिजिटल अपराध का नया हथियार बनती जा रही है। सवाल ये है — क्या हम पहचान पाएंगे कि कौन असली है और कौन नकली?
_202504051035194561.jpg)
x
_202504051035194561.jpg)
सोशल मीडिया पर Ghibli स्टाइल इमेज बनाने का ट्रेंड थमा भी नहीं था कि अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। चैटजीपीटी जैसे AI टूल्स की मदद से अब लोग फर्जी आधार और पैन कार्ड तक बना रहे हैं — और सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि ये कार्ड असली जैसे दिखते हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन, एलन मस्क, और यहां तक कि प्राचीन गणितज्ञ आर्यभट्ट के भी नकली पहचान पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ये मज़ाक अब एक खतरनाक मोड़ ले रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गंभीर दुरुपयोग देखा जा रहा है।
इतने रियल कि पहचानना मुश्किल!
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चैटजीपीटी की मदद से ऐसे आधार और पैन कार्ड बनाए जा रहे हैं जिनमें टेक्स्ट और डिज़ाइन लगभग हूबहू असली कार्ड जैसे लगते हैं। बस कुछ नंबर और डिटेल्स में मामूली गड़बड़ी होती है — लेकिन आम आंखों से फर्क कर पाना बेहद मुश्किल है। AI से तैयार ये नकली कार्ड सोशल मीडिया पर न सिर्फ वायरल हो रहे हैं बल्कि लोगों को चौंका भी रहे हैं। एक यूजर ने तो चेतावनी देते हुए कहा, "ये सिर्फ मज़ाक नहीं, एक सीरियस सिक्योरिटी रिस्क है।"
कैसे करें असली-नकली पहचान की जांच ?
QR कोड स्कैनिंग: असली आधार और पैन कार्ड में QR कोड होता है जिसे केवल प्रमाणित स्कैनर ही पढ़ सकते हैं। UIDAI और इनकम टैक्स पोर्टल पर वेरिफिकेशन: आधार और पैन वेरिफाई करने के लिए सरकारी वेबसाइट्स पर टूल्स उपलब्ध हैं।
स्पेलिंग और फॉर्मेट :
नकली कार्ड में अक्सर टेक्स्ट की अलाइनमेंट, फॉन्ट या स्पेलिंग में मामूली गड़बड़ियां होती हैं।
AI रेगुलेशन की उठी मांग :
इस पूरे मामले ने AI की निगरानी और रेगुलेशन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि अगर अभी नियंत्रण नहीं किया गया, तो AI का यही मज़ाक बड़ा साइबर क्राइम बन सकता है। अब सवाल ये है कि हम टेक्नोलॉजी को कहां तक मज़ाक मान सकते हैं और कहां से उसे गंभीरता से लेना ज़रूरी है?

Editorial
Next Story
Related News
X
