Wakf law pass by parliament
देश में वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाले वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने गुरुवार को इस विधेयक को 13 घंटे से अधिक चली बहस के बाद 128 बनाम 95 मतों से पारित किया। इससे एक दिन पहले, बुधवार रात लोकसभा ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी थी। सरकार ने इसके साथ मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी पास करवा लिया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग के जरिए गरीब, पसमांदा और मुस्लिम महिलाओं के जीवन में सुधार लाने का प्रयास है। विधेयक के लागू होने के बाद इसे 'उम्मीद' अधिनियम (Unified Waqf Management Empowerment, Efficiency and Development) नाम दिया जाएगा।
सरकार का दावा: पारदर्शिता, समावेशिता और मुस्लिम गरीबों का उत्थान :
रिजिजू ने बताया कि आज देश में 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, लेकिन इनसे मिलने वाली आय अपेक्षाकृत बेहद कम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों की लूट-खसोट और कुप्रबंधन को रोकना है, न कि धार्मिक हस्तक्षेप करना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार वक्फ की धार्मिक गतिविधियों में किसी प्रकार की दखल नहीं देगी और "चैरिटी कमिश्नर" की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित होगी। साथ ही, अब वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए वक्फ न्यायाधिकरण को भी सशक्त किया जाएगा और आवश्यक स्थिति में दीवानी अदालत में अपील की जा सकेगी।
महिलाओं और बच्चों के अधिकार होंगे सुरक्षित :
विधेयक में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ करता है, तो विधवा, तलाकशुदा महिलाओं और यतीम बच्चों के अधिकार सुरक्षित रखने होंगे। साथ ही, महिलाओं की संपत्ति पर वक्फ घोषित नहीं किया जा सकेगा, जब तक उन्हें उनकी कानूनी विरासत न दी जाए।
संरचना में बड़ा बदलाव: अब होगा प्रतिनिधित्व का संतुलन :
केंद्रीय वक्फ परिषद में अब 22 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकतम 4 गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। इनमें दो महिलाएं मुस्लिम समुदाय से अनिवार्य रूप से होंगी। इसी तरह, राज्य वक्फ बोर्ड में भी 11 सदस्य होंगे जिनमें पेशेवर, विधि विशेषज्ञ, सांसद और विधायक शामिल होंगे। यहां भी मुस्लिम समुदाय की दो महिला सदस्य अनिवार्य होंगी।
ASI की जमीन व स्मारक अब वक्फ घोषित नहीं होंगे :
सरकार ने विधेयक में स्पष्ट किया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत आने वाली जमीनें या स्मारक अब वक्फ संपत्ति घोषित नहीं की जा सकेंगी। साथ ही, जिलाधिकारी से ऊपर के अधिकारी को वक्फ घोषित की गई जमीन की जांच करने का अधिकार मिलेगा।
डिजिटलीकरण की ओर कदम: बनेगा सेंट्रल पोर्टल :
वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड के लिए एक केंद्रीय पोर्टल बनाने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। साथ ही, वक्फ संस्थानों को अब अपनी आय का सिर्फ 5% योगदान देना होगा, जो पहले 7% था।
विपक्ष ने बताया हस्तक्षेप, सरकार बोली- भ्रम फैलाया जा रहा है |
विपक्ष ने विधेयक को मुस्लिम समुदाय के मामलों में हस्तक्षेप करार दिया और कई संशोधन पेश किए, जिन्हें राज्यसभा ने खारिज कर दिया। मंत्री रिजिजू ने इन आरोपों को "भ्रामक और निराधार" बताया और कहा कि विधेयक को समावेशी बनाने के लिए JPC की रिपोर्ट के अनुसार कई सुझाव शामिल किए गए हैं।
'उम्मीद' कानून: क्या बदलेगा आगे?
इस विधेयक के पारित होने से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी, मुसलमान गरीबों और महिलाओं को लाभ मिलेगा, तथा वर्षों से लंबित 31,000 से अधिक वक्फ मामलों के निपटारे में तेजी आ सकेगी। अब देखना यह होगा कि 'उम्मीद' कानून ज़मीनी स्तर पर कितना असरदार साबित होता है और क्या यह वाकई वक्फ व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला पाएगा।
Editorial

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