UP Police Jobs: Data Disproves Akhilesh Yadav’s Statement
उत्तर प्रदेश में इन दिनों पुलिस विभाग में जातिगत तैनातियों को लेकर घमासान मचा हुआ है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने हाल ही में आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस सेवा में जाति के आधार पर तैनातियां हो रही हैं। उन्होंने खासतौर पर क्षत्रिय (ठाकुर) जाति के अधिकारियों की संख्या को लेकर सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने आगरा दौरे के दौरान आरोप लगाया कि आगरा, मैनपुरी, चित्रकूट और महोबा जैसे जिलों में अधिकतर थानों की कमान एक ही जाति के अधिकारियों के हाथ में है। उन्होंने दावा किया कि आगरा के 48 में से 15 थानों में ‘सिंह भाई लोग’ यानी ठाकुर समुदाय के अफसर तैनात हैं। इसी तरह मैनपुरी में 15 में से 10, चित्रकूट में 10 में से 5 और महोबा में 11 में से 6 थाना प्रभारी ठाकुर समुदाय से हैं। उन्होंने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए सोशल मीडिया पर एक चार्ट भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया कि वहां के 44 थानों में सिर्फ 11 ही पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समुदाय से हैं।
DGP ने किया खंडन :
अखिलेश यादव के इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने बयान जारी कर कहा कि अखिलेश यादव द्वारा प्रस्तुत आंकड़े भ्रामक हैं। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए जो व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करें।” DGP के बयान के बाद अखिलेश ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार खुद सामने आने से बच रही है और अधिकारियों को आगे कर रही है।
आंकड़े क्या कहते हैं ?
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) के 2023 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी पुलिस में कुल 3,01,289 कर्मी हैं। इनमें से आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC) से 1,95,272 कर्मी तैनात हैं — जो कुल बल का 65% हिस्सा है, जबकि स्वीकृत आरक्षण 50% है।
पदानुसार तैनातियां:
  • ASP/डिप्टी SP/सहायक कमांडेंट: SC – 182, ST – 14, OBC – 234
  • इंस्पेक्टर/RI: SC – 717, ST – 21, OBC – 1,433
  • SI/RSI: SC – 4,337, ST – 113, OBC – 10,508
  • ASI/ARSI: SC – 115, ST – 8, OBC – 223
  • हेड कांस्टेबल: SC – 11,635, ST – 538, OBC – 26,417
  • कांस्टेबल: SC – 44,311, ST – 3,687, OBC – 90,739
इस तरह कुल मिलाकर SC वर्ग से 61,337, ST से 4,381 और OBC से 1,29,554 कर्मी तैनात हैं। मौजूदा प्रतिशत देखें तो SC – 20.36%, ST – 1.50%, और OBC – 43% हिस्सेदारी के साथ पुलिस बल में कार्यरत हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस बल में आरक्षित वर्ग की भागीदारी स्वीकृत आरक्षण से अधिक है। हालांकि, अखिलेश यादव द्वारा प्रस्तुत क्षेत्रीय तैनातियों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मामला जातिगत प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक निष्पक्षता जैसे गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है।
Editorial

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