Nushrratt Bharuccha Slams Nepotism, Reveals Bollywood Truth
बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने इंडस्ट्री में नेपोटिज़्म और आउटसाइडर्स के संघर्ष को लेकर दिल खोलकर अपनी बात रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने स्टार किड्स को सीधे तौर पर टारगेट किए बिना यह बताया कि कैसे बाहरी लोगों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में मौके हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
नुसरत ने बताया कि उन्होंने सोनाक्षी सिन्हा (दबंग) और श्रद्धा कपूर (तीन पत्ती) के साथ ही बॉलीवुड में डेब्यू किया था, लेकिन फिर भी उन्हें अपनी फिल्म 'प्यार का पंचनामा' के हिट होने के बावजूद ज्यादा मौके नहीं मिले। वहीं, हाल ही में रिलीज़ हुई ड्रीम गर्ल 2 से उन्हें बाहर कर दिया गया और अनन्या पांडे को उनकी जगह ले लिया गया, जो उनके लिए बेहद हतोत्साहित करने वाला अनुभव रहा।
नुसरत ने पत्रकार शुभांकर मिश्रा को दिए एक इंटरव्यू में कहा :
“मैं उन्हें नेपो किड्स नहीं कहूंगी, क्योंकि मुझे वो टर्म पसंद नहीं। लेकिन हकीकत ये है कि उन्हें इंडस्ट्री में ओपोरच्युनिटी और इनरोड्स मिल जाते हैं, जो हमें नहीं मिलते। वो उन जगहों तक पहुंच सकते हैं, जिनका हमें एड्रेस तक नहीं पता होता।”
उन्होंने खुलकर बताया कि जब वो ‘प्यार का पंचनामा’ कर चुकी थीं, तब भी किसी डायरेक्टर से मिलने के लिए उन्हें सबसे पहले उसका नंबर और ऑफिस का पता खोजना पड़ता था — जो अपने आप में एक मुश्किल काम था।
“मान लीजिए मुझे किसी डायरेक्टर से मिलना है, तो मैं उसका नंबर कहां से लाऊं? ऑफिस कहां है, कैसे पता करूं? किससे पूछूं? ये रियल प्रॉब्लम है।”
नुसरत ने कबीर खान का उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार उन्होंने डायरेक्टर कबीर खान को मैसेज किया था, ये सोचकर कि शायद वो जवाब न दें, लेकिन उन्होंने रिप्लाई किया और मिलने का समय भी दिया।
“मैं एक महीने तक खुश रही कि कबीर सर ने जवाब दिया। मैंने उन्हें कहा भी कि सर, मैं बहुत टच्ड हूं कि आपने जवाब दिया।”
नुसरत भरूचा की यह ईमानदार और सटीक बातें एक बार फिर बॉलीवुड के अंदर चल रहे असमान अवसरों और इनसाइडर-आउटसाइडर की बहस को ताजा कर देती हैं। उनकी बातें न सिर्फ उनके संघर्ष को उजागर करती हैं बल्कि इंडस्ट्री में छुपे सिस्टमेटिक फेवरिटिज़्म पर भी सवाल खड़े करती हैं।
Editorial

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