150 से ज्यादा से पूछताछ! कश्मीर में खुफिया दबिश तेज
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों और जांच एजेंसियों ने इलाके में कार्रवाई तेज कर दी है। हमले से जुड़े सुराग जुटाने के लिए स्थानीय स्तर पर सघन जांच की जा रही है। इसी सिलसिले में अब तक पहलगाम के 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। घाटी के कई संवेदनशील इलाकों में भी सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है।


जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले के बाद जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा तेज़ी से बढ़ाया है। न्यूज़ एजेंसी ANI के मुताबिक, अब तक करीब 150 स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। बैरसन घाटी, जिसे 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' कहा जाता है, वहां काम करने वाले स्टॉल संचालक, जिपलाइन ऑपरेटर और घुड़सवारी कराने वाले लोगों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
जांच की कमान NIA के हाथ में, जंगलों में जारी सर्च ऑपरेशन :
शुरुआत में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन दिन तक आतंकी हमले की परतें खंगालीं, लेकिन अब जांच की कमान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने संभाल ली है। एनआईए हमले से जुड़े हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है। फिलहाल कोकरनाग क्षेत्र के जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी है, जहां पिछले एक हफ्ते में चार बार आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट मिले हैं।
हमले के पीछे पाकिस्तानी सेना का पूर्व कमांडो ?
खुफिया सूत्रों के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने में पाकिस्तानी सेना के पूर्व एसएसजी कमांडो हाशिम मूसा उर्फ 'आसिफ फौजी' का हाथ हो सकता है। बताया जा रहा है कि हाशिम मूसा इससे पहले भी सोनमर्ग के गगनगीर में टनल कंपनी पर हमले में शामिल था। वह उस समय स्थानीय आतंकी आदिल के साथ देखा गया था और श्रीनगर में एक मुठभेड़ के दौरान भाग निकला था। माना जा रहा है कि वह त्राल के रास्ते श्रीनगर से पहलगाम तक पहुंचा और उसी ग्रुप ने इस बार फिर वारदात को अंजाम दिया।
बेगुनाहों की हत्या: धर्म पूछकर मारे गए पर्यटक :
22 अप्रैल को हुए इस हमले में कुल 26 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। आतंकी बैरसन घाटी में घूम रहे पर्यटकों को निशाना बना रहे थे और चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने लोगों से पहले धर्म पूछा, फिर गोलियां बरसाईं। पहलगाम आतंकी हमला केवल एक आतंकवादी कार्रवाई नहीं बल्कि एक साजिश थी, जो सीमापार से संचालित और प्रशिक्षित गुटों द्वारा अंजाम दी गई। अब सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पुष्टि करने में जुटी हैं कि हमले के पीछे कौन-कौन से नेटवर्क और लॉजिस्टिक सपोर्ट शामिल थे।

