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'2034 तक CM Fadanvis...' ; Bawankule के दावे पर Shinde का पलटवार
By EditorialPublished on
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने हाल ही में दावा किया कि देवेंद्र फडणवीस 2034 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासी हलचल को और तेज कर दिया है। बावनकुले के इस दावे पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने तीखा तंज कसा। कदम ने कहा, अगर वे चाहें तो 2080 तक मुख्यमंत्री बने रहें, हमें कोई आपत्ति नहीं है। रामदास कदम का यह व्यंग्यात्मक जवाब सियासी गलियारों में खूब चर्चित हो रहा है और इसे विपक्ष की

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महाराष्ट्र की सियासत में शुक्रवार को नया ताप आ गया जब बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने दावा किया कि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnvis) 2034 तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। मुंबई के एक कार्यक्रम में बोलते हुए बावनकुले ने कहा, “फडणवीस महाराष्ट्र के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्री हैं। 'विकसित महाराष्ट्र' के सपने को साकार करने के लिए अगले 9 वर्षों तक उनके नेतृत्व की जरूरत है।” बावनकुले ने आगे कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और राज्य में फडणवीस के नेतृत्व वाली "डबल इंजन" सरकार महाराष्ट्र को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से फडणवीस के पीछे एकजुट रहने की अपील की।
एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने दिया जवाब :
बावनकुले के इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री (DCM) और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने मात्र एक शब्द कहा — "शुभकामनाएं"। शिंदे के इस जवाब को सियासी हलकों में एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे गठबंधन की एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है।
रामदास कदम (Ramdas Kadam) का चुटीला बयान :
वहीं शिवसेना के वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने बावनकुले के बयान पर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी ली। उन्होंने कहा, "अगर फडणवीस 2080 तक भी मुख्यमंत्री बने रहते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। हमारी शुभकामनाएं फडणवीस, बावनकुले और शिंदे — तीनों के साथ हैं। कदम ने साफ किया कि महायुति गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और कोई भी उनके बीच फूट डालने में सफल नहीं हो सकता।
सियासी माहौल गर्म :
बावनकुले के इस दावे के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष इसे बीजेपी की सत्ता की भूख बताकर निशाना साध सकता है, जबकि महायुति फिलहाल विकास और स्थायित्व का संदेश देकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
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