✕
DCM Keshav Maurya के खिलाफ FIR दर्ज; High Court सख्त
By EditorialPublished on
उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचाने वाला मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अब कानूनी घेरे में आते नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक गंभीर याचिका दाखिल की गई है, जिसमें उन पर फर्जी डिग्री के जरिए चुनाव लड़ने और सरकारी लाभ उठाने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि मौर्य ने जिस डिग्री का इस्तेमाल किया, वह न तो विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त है और न ही कानूनी रूप से वैध। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए याचिका स्वीकार कर ली
_202504251258246062.png)
x
_202504251258246062.png)
उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन से प्राप्त डिग्री को फर्जी बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है, जिसे अदालत ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
इस याचिका को सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने दाखिल किया है। याचिका में आरोप है कि मौर्य ने हिंदी साहित्य सम्मेलन से जो डिग्री प्राप्त की है, वह किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय की नहीं है और इसके आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ा और पेट्रोल पंप का आवंटन भी प्राप्त किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कृत्य कानूनन दंडनीय है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।
पहले इस मामले को जिला न्यायालय ने अर्जी दाखिले में देरी का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, लेकिन वहाँ भी 318 दिनों की देरी के कारण याचिका खारिज हो गई थी। याची सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहाँ से हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पुनः सुनवाई का आदेश दिया गया।
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका दाखिले में हुई देरी को माफ करते हुए 6 मई को अगली सुनवाई की तारीख तय की है। जस्टिस संजय कुमार सिंह की एकल पीठ में हुई सुनवाई में कोर्ट ने महानिबंधक कार्यालय को याचिका को नियमित नंबर आवंटित कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और आगामी सुनवाई में क्या फैसला आता है, इस पर सबकी नजरें टिकी होंगी। अगर कोर्ट एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता है, तो यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
Next Story
Related News
X

