Pakistan Rattled by India’s Sindhu Move, Warns of War
​22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है। इस हमले की जिम्मेदारी 'कश्मीर रेजिस्टेंस' नामक एक नए आतंकी संगठन ने ली है, जिसे भारतीय एजेंसियाँ पाकिस्तान-आधारित लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा मानती हैं ।​
भारत की प्रतिक्रिया :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले को "क्रूर और कायराना" बताते हुए दोषियों को "धरती के किसी भी कोने से खोजकर सज़ा दिलाने" का संकल्प लिया है । भारत ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं। सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जिससे पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है ।
वाघा बॉर्डर को बंद कर दिया गया है, जो दोनों देशों के बीच एकमात्र सक्रिय भूमि सीमा थी ।​
पाकिस्तानी नागरिकों के वीज़ा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं, और उन्हें भारत छोड़ने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है।
पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित किया गया है, और इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के स्टाफ को 55 से घटाकर 30 कर दिया गया है ।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया :
पाकिस्तान ने भारत के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसका इस हमले से कोई संबंध नहीं है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (NSC) की बैठक में निम्नलिखित जवाबी कदम उठाए गए:​
भारतीय नागरिकों के वीज़ा रद्द कर दिए गए हैं, और सभी भारतीयों को 30 अप्रैल तक पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दिया गया है। वाघा बॉर्डर को पाकिस्तान की ओर से भी बंद कर दिया गया है ।​ भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद कर दिया गया है ।​ सभी द्विपक्षीय समझौते, जिनमें शिमला समझौता भी शामिल है, को निलंबित कर दिया गया है ।​ पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि भारत सिंधु नदी का जल रोकता है, तो इसे "युद्ध की घोषणा" माना जाएगा ।​
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया :
कश्मीर में स्थानीय लोगों ने इस हमले की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च आयोजित किए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस हमले की निंदा की है और भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की है ।​ यह घटना भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ सकती है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच, क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।​
Editorial

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