mumbai jain mandir
मुंबई। मुंबई के विले पार्ले ईस्ट स्थित नेमिनाथ को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में लगभग 30 साल पुराने दिगंबर जैन मंदिर को 16 अप्रैल को बीएमसी ने तोड़ दिया। इस दिन सिविल कोर्ट का स्थगनादेश खत्म होते ही बीएमसी ने तत्काल यह तोड़ू कार्रवाई की थी। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष चेतन देढिया ने घटना की समीक्षा के बाद कहा कि बीएमसी की कार्रवाई ज़रूरत से ज़्यादा थी और मंदिर परिसर खाली करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए था। इस कार्रवाई के विरोध में सैकड़ों जैन समुदाय के लोगों ने 19 अप्रैल को शांतिपूर्ण मार्च निकालकर अपना तीव्र विरोध प्रकट किया था।
सर्वे के अनुसार, बीएमसी सुबह 10 बजे पहुंची और 10:15 बजे तोड़फोड़ शुरू कर दी। मंदिर परिसर के भीतर स्थित था, वह किसी सार्वजनिक जगह पर नहीं था, और किसी विकास योजना के आड़े नहीं आ रहा था। फिर बीएमसी ने इतनी जल्दबाजी क्यों की?
7 अप्रैल को सिविल कोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट की याचिका खारिज करते हुए उन्हें हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 7 दिन की अंतरिम सुरक्षा दी थी, जो 15 अप्रैल को समाप्त हो गई। मंदिर ट्रस्टी अनिल शाह ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
Editorial

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