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मंदिर तोड़ने के विरोध में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन, शांतिपूर्ण आंदोलन जारी
By EditorialPublished on
विले पार्ले (पूर्व) स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन चैत्यालय को तोड़ने के विरोध में जैन समाज ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया।
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प्रात:काल संवाददाता मुंबई। विले पार्ले (पूर्व) स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन चैत्यालय को तोड़ने के विरोध में जैन समाज ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया। मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न भागों से हज़ारों श्रद्धालु विले पार्ले पहुँचे और विरोध दर्ज कराया। पुणे, पनवेल, खारघर, नेरुल, ऐरोली, वाशी, दहिसर, भायंदर, बोरीवली, मलाड, कांदिवली, ठाकुर विलेज, ठाकुर कॉम्प्लेक्स, गोरेगांव, अंधेरी, भायखला, दादर, खार, विले पार्ले, अंधेरी (पूर्व), मुलुंड, ठाणे, घाटकोपर, भिवंडी, ताड़देव, भूलेश्वर, माझगांव, चर्नी रोड आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। दिगंबर मुनि सुयत्नसागर महाराज तथा श्वेतांबर संप्रदाय से मुनि विनीतसागर महाराज ने कहा कि जैन समाज को अब आपसी मतभेद भुलाकर एक स्वर में अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना होगा। कुछ दिनों पूर्व मध्यप्रदेश के नीमच में रात्रि के समय जैन मुनियों पर हुआ हिंसक हमला, मुंब्रा स्थित बाहुबली दिगंबर जैन तीर्थ पर हो रहे अतिक्रमण और जबलपुर में एक राजनेता द्वारा जैन समाज को “रावण” कहने की घटना का सभी वक्ताओं ने विरोध किया।
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महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, दिलीप घेवारे, जमनालाल हपावत, तरुण काला, विकास सेठी, जयेश शाह, किरीट दोशी, प्रवीण जैन, अंकित जैन, कमल गंगवाल, विनय पाटनी, महेंद्र जैन सहित अनेक मुंबई के जैन मंदिरों के पदाधिकारीगण प्रदर्शन में पैदल चलकर उपस्थित रहे। प्रदर्शन के दौरान “अहिंसक हैं पर कायर नहीं”, “सत्य अहिंसा प्यारा है, यही हमारा नारा”, “अब और अत्याचार नहीं सहेंगे” जैसे नारे गूंजते रहे। नारेबाज़ी जोशपूर्ण थी, किंतु प्रदर्शन पूरी तरह अहिंसक, अनुशासित और संगठित रहा। मुंबई उत्तर-मध्य की सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने इस घटना को अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों पर आघात बताया। वे रैली में पूरे समय पैदल चली और जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल के साथ मनपा आयुक्त भूषण गगरानी से भेंट कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई एवं चैत्यालय के उसी स्थान पर पुनर्निर्माण की माँग की।
समाज ने इस कार्य के लिए ज़िम्मेदार मनपा अधिकारियों का निलंबन, मंदिर का उसी स्थान पर शीघ्र पुनर्निर्माण और मनपा द्वारा सार्वजनिक क्षमा याचना की माँग रखी। जैन समाज के समर्थन में स्थानीय नेता भी उतर आए हैं। जैन समुदाय ने शनिवार सुबह 9.30 बजे विरोध प्रदर्शन शुरू किया। विरोध प्रदर्शन से पहले जैन बंधुओं ने ध्वस्त मंदिर में आरती की। फिर आंदोलन शुरू हुआ।
जैन समाज के समर्थन में उतरी कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “पूजा स्थलों की देखभाल करना सरकार का काम है। ऐसा होता नहीं दिख रहा है। यह कार्रवाई पहले से ही योजनाबद्ध थी। यह एक साजिश है। शांतिप्रिय जैन समुदाय को इस साजिश के खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ा है।” उन्होंने कहा, “राजस्थान और मुंबई में जैन समुदाय की रैलियां हो रही हैं।” इस रैली में सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के शामिल होने पर वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “यही बात मुझे हैरान करती है। सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक और मंत्री रैली में शामिल होते हैं और वे ही सरकार हैं।” इस आंदोलन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हो गई हैं। विरोध प्रदर्शन में भाग ले रही महिलाओं ने कहा है कि बीएमसी की कार्रवाई अनुचित है।
जैन समाज का आरोप है कि बीएमसी अधिकारियों ने एक होटल मालिक के साथ मिलीभगत कर अवैध रूप से उनके मंदिर को तोड़ा। विधायक मुरजी पाटिल ने कहा कि, हम इन सभी चीजों की निंदा करते हैं। जल्द से जल्द अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, उन्हें हटाया जाना चाहिए। हम मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मिलेंगे। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि हम इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करवाएंगे। जैन समुदाय ने कहा है कि कोर्ट के फैसले के बाद बीएमसी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी। ट्रस्टी अनिल शाह ने कहा कि मुंबई नगर निगम ने अदालत के फैसले का इंतजार नहीं किया। मंदिर के ट्रस्टियों ने कहा कि बीएमसी को पता था कि हमने हाईकोर्ट में अपील दायर की है, लेकिन बीएमसी प्रशासन ने जल्दबाजी में मंदिर को तोड़ दिया। इसलिए जैन समाज की ओर से इस मामले की जांच की मांग की जा रही है। सोमवार को फिर मनपा के प्रशासनिक अधिकारयों के साथ मीटिंग में जैन समाज अपनी बात रख लिखित में आदेश का निवेदन करेगा। यह जानकारी राजमल पेमावत ने दी।

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