Wakf Law Under Fire in SC
मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य आरिफ मसूद ने वक्फ कानून में हाल ही में किए गए संशोधनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मसूद ने यह याचिका व्यक्तिगत स्तर पर दाखिल की है और इसमें नए वक्फ कानून को पूरी तरह रद्द करने या आवश्यकतानुसार नए सिरे से संशोधित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर 15 अप्रैल को सुनवाई होगी।
'12 में से 12 नॉन-मुस्लिम, तो इंसाफ कैसा? '
मीडिया से बात करते हुए आरिफ मसूद ने कहा, “वक्फ कानून को लेकर एक याचिका मैंने सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी है। उम्मीद है कि हमारे एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा इसे मजबूत तरीके से पेश करेंगे। हमने याचिका में कई कमियों को उजागर किया है। जब सेंट्रल वक्फ बोर्ड में 22 मेंबर्स में से 12 नॉन-मुस्लिम होंगे, तो फिर इंसाफ कहां रह गया?”
कानून में भ्रम फैलाया जा रहा – मसूद :
कांग्रेस विधायक ने यह भी कहा कि नए वक्फ कानून में जिस तरह से यह प्रचारित किया जा रहा है कि “एक प्रॉपर्टी लेकर दूसरे को दी जाएगी”, वह कानून की वास्तविकता से दूर है। उन्होंने इसे लोगों को भ्रमित करने की साजिश बताया।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद :
आरिफ मसूद ने स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल एक धर्म या राजनीति का नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और संविधानिक मूल्यों का है। उन्होंने भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा और यह विवादित कानून या तो रद्द होगा या पूरी तरह से पुन: संरचित किया जाएगा। अगर आप चाहें तो इसके साथ एक सेक्शन “वक्फ कानून क्या है?”, “संशोधन में क्या बदला?”, या “राजनीतिक प्रतिक्रिया” भी जोड़ा जा सकता है। बताइए, आगे क्या चाहिए?
Editorial

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