Donald Trump and Vladimir Putin
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार, 30 मार्च को मिडीया को दिए एक इंटरव्यू में रूस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से 'नाराज' हैं और यदि रूस-यूक्रेन युद्धविराम पर सहमति नहीं बनती, तो अमेरिका उन सभी देशों पर 50 प्रतिशत का अतिरिक्त ट्रैरिफ लगाएगा जो रूस से तेल खरीदते हैं। ट्रंप के इस बयान ने न केवल अमेरिका-रूस संबंधों में हलचल मचा दी बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तनाव बढ़ा दिया।
क्रेमलिन की प्रतिक्रिया: शांति का संदेश या कूटनीतिक चाल ?
ट्रंप के बयान के बाद, रूस ने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अमेरिका के साथ संबंध सुधारने की दिशा में काम करना जारी रखेगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता, दिमित्री पेसकोव ने कहा, "हम अमेरिकी पक्ष के साथ काम करना जारी रखेंगे, सबसे पहले, अपने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करेंगे।" क्रेमलिन का यह बयान शांति प्रयासों की ओर इशारा करता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह एक रणनीतिक कदम भी हो सकता है।

यूक्रेन युद्ध पर बातचीत जारी, लेकिन जमीनी हालात अलग :
रूस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के साथ यूक्रेन संकट पर चर्चा कर रहा है और शांति समझौते की संभावनाओं को तलाश रहा है। हालांकि, युद्ध के मैदान में रूस का रुख अब भी आक्रामक बना हुआ है। हाल ही में रूस ने खारकीव में लगातार दूसरे दिन बमबारी की, वहीं यूक्रेन ने रूस पर ड्रोन हमलों के जरिए जवाब दिया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कूटनीतिक बातचीत जमीनी हालात को बदल पाएगी।
स्वीडन का यूक्रेन को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य सहायता :
इस बीच, यूरोप से भी रूस के खिलाफ मजबूत कदम उठाए जा रहे हैं। स्वीडन ने यूक्रेन को 1.2 बिलियन पाउंड का सैन्य सहायता पैकेज देने की घोषणा की है। यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य समर्थन है, जो यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगा। स्वीडिश रक्षा मंत्री के अनुसार, यह पैकेज रूस के आक्रामक रुख के खिलाफ यूक्रेन को मजबूती देने के लिए दिया गया है।
क्या अमेरिका-रूस संबंधों में आ सकता है बदलाव ?
ट्रंप और क्रेमलिन के ताजा बयानों के बाद एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका और रूस के संबंधों में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा या यह सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रहेगा? आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली कूटनीतिक चालें इस तनावपूर्ण स्थिति की दिशा तय करेंगी।
Editorial

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