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Reciprocal Tariff का मतलब क्या है? और इसे कब लगाया जाता है ?; जानते है शुरुसे..
By EditorialPublished on
रेसिप्रोकल का मतलब होता है प्रतिशोधात्मक। यानी जैसे को तैसा वाली नीति। इसे ऐसे समझिए कि रेसिप्रोकल टैरिफ एक ऐसा टैक्स या व्यापार प्रतिबंध है जो एक देश दूसरे देश पर तब लगाता है, जब वह देश भी उसी तरह का टैक्स या प्रतिबंध पहले देश पर लगाता है। मतलब, अगर एक देश दूसरे देश के सामान पर 100 फीसदी टैक्स लगाता है, तो दूसरा देश भी उसी तरह का टैक्स लगा सकता है। इसका मकसद व्यापार में संतुलन बनाना होता है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने की घोषणा की, यह कहते हुए कि भारत अमेरिका से 100% से ज्यादा टैरिफ वसूलता है। यह कहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार सुबह-सुबह भारत को एक बड़ा झटका दे दिया। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के जॉइंट सेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने बहोतसे नियम के बारे में कहा है। अपने 1 घंटा 44 मिनट के भाषण में ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने 43 दिन में जो किया, वह कई सरकारें अपने 4 या 8 साल के कार्यकाल में नहीं कर पाईं। चलिए, अब जानते हैं की आखिर रेसिप्रोकल शब्द का मतलब क्या होता है और यह कोई देश किसी दूसरे देश पर कब लगाता है।
यह रेसिप्रोकल टैरिफ क्या है?
रेसिप्रोकल का मतलब होता है प्रतिशोधात्मक। यानी जैसे को तैसा वाली नीति। इसे ऐसे समझिए कि रेसिप्रोकल टैरिफ एक ऐसा टैक्स या व्यापार प्रतिबंध है जो एक देश दूसरे देश पर तब लगाता है, जब वह देश भी उसी तरह का टैक्स या प्रतिबंध पहले देश पर लगाता है। मतलब, अगर एक देश दूसरे देश के सामान पर 100 फीसदी टैक्स लगाता है, तो दूसरा देश भी उसी तरह का टैक्स लगा सकता है। इसका मकसद व्यापार में संतुलन बनाना होता है।
यह रेसिप्रोकल टैरिफ से अर्थव्यवस्था क्या बदलाव होते है ?
१) व्यापार संतुलन: यह सुनिश्चित करना की कोई देश दूसरे देश के सामान पर ज्यादा टैक्स न लगाए।
२) स्थानीय उद्योगों की सुरक्षा: विदेशी सामान महंगा होने से स्थानीय उद्योगों को फायदा होता है।
३) व्यापार वार्ता का हिस्सा: कई बार देश इसे एक वार्ता के तौर पर इस्तेमाल करते हैं ताकि दूसरा देश टैक्स कम करे।
यह रेसिप्रोकल टैरिफ के दुष्परिणाम क्या है ?
१) व्यापार युद्ध: अगर दोनों देश एक-दूसरे पर टैक्स लगाते रहें, तो यह व्यापार युद्ध यानी ये ट्रेड वॉर में बदल सकता है।
२) महंगाई: विदेशी सामान महंगा होने से उपभोक्ताओं को नुकसान होता है।
३) आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: व्यापार युद्ध से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है।
इसका पुरा इतिहास क्या है ?
१) 19वीं सदी में 1860 में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कोबडेन-शेवेलियर संधि के तहत टैरिफ कम किए गए।
२) 1860 में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कोबडेन-शेवेलियर संधि हुई, जिसमें टैरिफ कम किए गए।
३) 1930 का दशक: अमेरिका ने स्मूट-हॉले टैरिफ एक्ट लागू किया, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ और महामंदी बढ़ी।
४) ट्रंप प्रशासन ने चीन, यूरोपीय संघ और अन्य देशों पर टैरिफ लगाए, जिसके जवाब में उन देशों ने भी अमेरिकी सामान पर टैक्स बढ़ा दिए।

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