नितेश राणे पर उद्धव गट का तंज
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य अनिल परब ने महाराष्ट्र के मंत्री और बीजेपी नेता नितेश राणे पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राणे पर विभाजनकारी बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हिंदू धर्म को ऐसे स्वयंभू रक्षकों की जरूरत नहीं। विधान परिषद में बोलते हुए परब ने बिना नाम लिए राणे को ‘नेपाली मंत्री’ करार दिया और कहा कि महाराष्ट्र में किसी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि लोगों को क्या खाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे धर्म को बचाने के लिए किसी की जरूरत नहीं है। हमें बालासाहेब ठाकरे ने सिखाया है कि बिना किसी अन्याय के हिंदुत्व के मूल्यों को बनाए रखें।”
‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ विवाद में गरमाई राजनीति :
मामला तब तूल पकड़ने लगा जब नितेश राणे ने इस महीने ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ नामक एक मंच की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा संचालित ‘झटका’ मटन की दुकानों को प्रमाणित करना है। इस पहल पर सवाल उठाते हुए परब ने कहा कि “एक मंत्री अचानक सामने आता है और लोगों को बताता है कि उन्हें क्या खाना चाहिए। यह खतरनाक है और समाज में तनाव पैदा कर सकता है।”
‘राणे का यह झूठा अभिमान है’ :
अनिल परब ने आरोप लगाया कि राणे खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताने की कोशिश कर रहे हैं और इस तरह के दावों से राज्य में जातीय विभाजन को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा, “मुंबई में पहले से ही कई हाउसिंग सोसायटी मांसाहारियों को संपत्ति खरीदने से रोकती हैं। इस तरह की सोच को बढ़ावा देना बेहद गलत है।” परब ने नितेश राणे को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि हिंदू धर्म उनकी वजह से सुरक्षित है। यह झूठा अभिमान है। हमारे धर्म को ऐसे रक्षकों की जरूरत नहीं जो दूसरे धर्मों के साथ अन्याय करें।”
राजनीतिक हलकों में बढ़ा विवाद :
इस बयानबाजी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। जहां शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है, वहीं इस पूरे मुद्दे ने राज्य में धार्मिक और सामाजिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। अब देखना होगा कि नितेश राणे इस तीखे हमले का क्या जवाब देते हैं और यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।
Editorial

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