अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी; राष्ट्रपति ट्रंप ने किए अहम आदेशों पर हस्ताक्षर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल में लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। अब उन्होंने देश की चुनाव प्रणाली में बड़े बदलाव की पहल की है। हाल ही में किए गए नए आदेश पर हस्ताक्षर के बाद मतदान प्रक्रिया में अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस कदम से चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा, लेकिन विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करार दिया है। ऐसे में यह बदलाव अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल में लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने देश की चुनाव प्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर ली है। हाल ही में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर आगे की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया है। इन आदेशों के तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, डाक से मतदान (मेल-इन वोटिंग) के नियमों में भी संशोधन किया जाएगा।
केवल चुनाव के दिन तक प्राप्त होने वाले मतपत्र मान्य होंगे
ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश के अनुसार, अब केवल चुनाव के दिन तक प्राप्त होने वाले मतपत्रों को ही गिनती में शामिल किया जाएगा। इस फैसले के पीछे ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इससे चुनावों में अधिक पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। अपने ताजा आदेश में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब तक बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफल रहा है, जिसे ठीक करने की आवश्यकता है।
संघीय मदद रोकने की चेतावनी
नए कार्यकारी आदेश जारी होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने राज्यों से मतदाता सूचियों को साझा करने और चुनाव अपराधों पर मुकदमा चलाने के लिए संघीय एजेंसियों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यदि कोई राज्य इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली संघीय वित्तीय मदद रोकी जा सकती है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
चुनावों में धांधली के आरोप और ट्रंप की सख्त कार्रवाई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने हालिया फैसलों के कारण मताधिकार संगठनों के तीव्र विरोध और कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते आ रहे हैं कि अमेरिका के चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में मिली हार के बाद से ही वे मतदान प्रणाली से जुड़े कई कानूनों का खुलकर विरोध कर रहे हैं और बार-बार धोखाधड़ी के आरोप लगा रहे हैं।
मेल वोटिंग पर ट्रंप का सख्त रुख
ट्रंप विशेष रूप से डाक मतदान (मेल-इन वोटिंग) को लेकर मुखर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस सुरक्षा उपाय के यह प्रणाली चुनावी धोखाधड़ी को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, हाल ही में जब उनके समर्थकों और रिपब्लिकन नेताओं के बीच मेल-इन वोटिंग लोकप्रिय हो गई, तो उन्होंने इस मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। अमेरिकी चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं और ऐसे मामलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।
'आने वाले हफ्तों में और बड़े फैसले'
मंगलवार को कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने संकेत दिया कि चुनाव सुधार से जुड़े और भी कई बड़े फैसले आने वाले हफ्तों में लिए जाएंगे। उनके अनुसार, यह परिवर्तन अमेरिकी लोकतंत्र की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।
ट्रंप के इस फैसले पर डेमोक्रेट्स और नागरिक अधिकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ये बदलाव मताधिकार को सीमित करने और चुनाव प्रक्रिया को पक्षपाती बनाने की कोशिश हैं। अब यह देखना होगा कि इन नए आदेशों को लेकर अमेरिकी राजनीति में आगे क्या हलचल होती है।

